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वायु प्रदूषण – दिल्ली में हैलीकॉप्टर छिड़काव की तैयारी तो गाज़ियाबाद में सोए है अधिकारी

वायु प्रदूषण – दिल्ली में हैलीकॉप्टर छिड़काव की तैयारी तो गाज़ियाबाद में सोए है अधिकारी

गाज़ियाबाद | सर्दियाँ की शुरुआत से ही राजधानी दिल्ली समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है। यही कारण था कि पटाखों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट को इस क्षेत्र में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाना पड़ा। दिल्ली सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए गंभीर स्थिति वाले क्षेत्रों में हैलीकॉप्टर के जरिए पानी के छिड़काव के प्रयास कर रही है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को पत्र लिखकर पानी के छिड़काव की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है ताकि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके। हैलीकॉप्टर से होने वाले पानी के इस छिड़काव का खर्चा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति अपने एयर एम्बिएन्स फंड से उठाने के लिए तैयार है।

गाज़ियाबाद में सोए है अधिकारी

जहां एक ओर दिल्ली सरकार अपने नागरिकों को वायु प्रदूषण से हर संभव प्रयत्न करने के लिए तैयार है वहीं दूसरी ओर हमारे गाज़ियाबाद में ज्यादातर अधिकारी अभी भी चिंता मुक्त होकर चैन की नींद सो रहे हैं। कूड़ा और पत्तियों आदि के जलाने पर प्रतिबन्ध के बावजूद गाज़ियाबाद की लगभग हर कॉलोनी में प्रतिदिन टनों के हिसाब से कूड़ा जलाया जा रहा है। कूड़ा जलाने के इस काम में खुद गाज़ियाबाद नगर निगम के कर्मचारी ही लगे हुए हैं जबकि एनजीटी के आदेशों के मुताबिक शहर में कूड़ा न जलने देने की जिम्मेदारी गाज़ियाबाद नगर निगम की ही है।

अधिकारियों की अकर्मण्यता का यह आलम है कि गाज़ियाबाद में बुलंदशहर रोड, साहिबाबाद, लोनी और डासना मसूरी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों और शहर की विभिन्न कॉलोनियों में पड़े खाली प्लाटों में पहले नगर निगम के कर्मचारी अपने डंपरों से कूड़ा डालते हैं और फिर उसे नष्ट करने के लिए आग लगा देते हैं, जबकि यह एनजीटी के आदेशों के अवहेलना है। यही नहीं, अदालती आदेशों के अनुसार कूड़ा जलाने पर ₹5,000 के दंड का भी प्रावधान है।

जिला बनने के दशकों बाद भी न तो गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण और न ही नगर निगम ने गाज़ियाबाद की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या पर कोई गंभीर प्रयास किया है। जब कभी भी केंद्र या राज्य सरकार की पहल पर कूड़ा निस्तारण की कोई नई योजना आती है तो उसके फंड को हजम करने के लिए अधिकारी आनन-फानन में प्लान बनाकर उसे कागज़ों में ही पूरा कर देते हैं। इसका एक उदाहरण हाल ही में हुआ डस्टबिन घोटाला है जिसमें गाज़ियाबाद नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर स्वच्छ भारत मिशन के तहत नागरिकों को मिलने वाले कूड़ेदानों के लिए मिले करोड़ों रुपयों को तथाकथित रूप से आपस में ही बाँट कर कागज़ों में प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया। आश्चर्य की बात यह है कि चोर-चोर मौसेरे भाई वाली कहावत की तर्ज पर ही इस घोटाले के जांच के लिए निगम ने अपने ही कर्मचारियों की एक समिति बनाकर घोटाले की जांच कराई और खुद को दोषमुक्त कर लिया। जबकि इस घोटाले में निगम के आला अधिकारियों समेत कई जन प्रतिनिधि भी शामिल थे।

निचले कर्मचारियों पर ही होती है कार्यवाही

यदि कोई जागरूक नागरिक अधिकारियों से कर्मचारियों द्वारा कूड़ा जलाने की शिकायत करता है तो ज्यादातर मामलों में निगम कोई भी कार्यवाही नहीं करता है। जनता के दबाव में आकर कभी निगम के अधिकारियों को कार्यवाही करनी भी होती है तो वह गलियों में काम करने वाले सफाई कर्मचारियों पर कार्यवाही कर खानापूर्ति कर लेता है। जबकि सफाई कर्मचारियों का कहना है कि कूड़े के वैज्ञानिक रूप से निस्तारण के लिए उन्हें निगम ने आवश्यक संसाधन ही उपलब्ध नहीं कराये हैं।

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By हमारा गाज़ियाबाद ब्यूरो : Sunday 17 दिसंबर, 2017 02:09 AM