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बच्चों पर बोझ नही बनना चाहते भगवान दास, छोटी सी दुकान चलाकर जी रहे मजे की ज़िन्दगी

बच्चों पर बोझ नही बनना चाहते भगवान दास, छोटी सी दुकान चलाकर जी रहे मजे की ज़िन्दगी

गाज़ियाबाद। जिंदगी में ऊँचाइयों तक पहुँचने और खुद को काबिल बनाने के लिए किसी रस्सी या सहारे की जरूरत नही होती, अगर खुद में ईमानदारी और उसके साथ कुछ करने का भीतरी जज्बा हो तो दुनिया की कोई ताक़त आपको कुछ भी अच्छा करने से रोक नही सकती। अमीर हो या गरीब बड़ा बनाना सब चाहते हैं लेकिन असली बड़प्पन पैसों से नही दिल से आता है।

आज हम आपको ऐसी ही जिंदगी के उतार चढ़ाव को पारकर खुद्दारी के साथ अपना जीवन बिताने वाले इन्सान की कहानी से रुबरु करवाने जा रहे हैं। ये कहानी है रजापुर के रहने वाले 60 वर्षीय भगवान दास की जो उम्र के इस पड़ाव में आकर भी सक्षम हैं। कविनगर चौराहा के पास ठेले पर छोटी सी दुकान चलाने वाले भगवान दास गरीब तो हैं लेकिन इनके दिल की अमीरी किसी मायने में इनको छोटा या बड़ा नही बताती।

पिछले करीब 12 सालों से इसी जगह बैठकर लोगों के न जाने कितने ऐब देखे हैं। भगवान दास का अपना एक परिवार है और वर्तमान में इनके सभी लड़के अपने पैरों पर खड़े हैं। एक बेटी भी है जिसकी शादी हो चुकी है। भगवान दास की अपनी छोटी सी दुकान सुबह ही खुल जाती है और दिनभर ये रेडियो पर पुराने नगमे सुनते रहते हैं। ये बताते हैं कि दुनिया की गन्दी मानसिकता और इनके पचड़ों में हम पड़ना नही चाहते, बस इसलिए रेडिओ को ही अपना साथी बना रखा है।

दुनिया वालों को ये भी मानते हैं कि अपने काम से बढ़कर दुनिया के किसी काम में सूकून नही है। दुकान से पहले भगवान दास एक फैक्ट्री में 1200 की तनख्वाह पर नौकरी किया करते थे। लेकिन उतने पैसो से किसी का कौन सा भला होने वाला है इसी के चलते नौकरी छोड़कर अपना खुद का छोटा सा काम कर लिया। भगवान दास बताते हैं कि काम छोटा है और मैं गरीब हूँ तो क्या हुआ, इस दुनिया में लोगों को सिर्फ खुद से मतलब है।

भगवान दास अपनी जरूरतों को कम रखकर और परिस्थितियों से तालमेल बिठाकर युहीं पूरी उम्र शान, ईमानदारी और खुद्दारी का जीवन जीना चाहते हैं। उम्र के इस पड़ाव में आकर भी इस काम को करने के जवाब में इन्होने कहा कि ये मेरा शौक है क्यूंकि खाली दिमाग शैतान का घर होता है।

भगवान दास की ये जिन्दगी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो लोग उम्र के इस पड़ाव में आकर अपने पाल्यों पर निर्भर रहना चाहते हैं। हमारा गाजियाबाद की टीम भगवान दास के इस जज्बे को सलाम करती है।

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