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शाबाश गाज़ियाबाद: दिव्यांग होकर भी छोटी सी दुकान चलाकर खुद के पैरों पर खड़ा है ये शख्स

शाबाश गाज़ियाबाद: दिव्यांग होकर भी छोटी सी दुकान चलाकर खुद के पैरों पर खड़ा है ये शख्स

गाज़ियाबाद। आपने अपने शहर, गलियों, मोहल्लो और चौराहों पर बहुत से ऐसे लोग देखे होंगे जो दिव्यांग हैं, ऐसे लोग खुद का पेट पालने के लिए भीख मांगते हैं। भीख माँगना ही उनका पेशा है क्यूंकि वो अपनी जिन्दगी में केवल मुफ्तखोरी की रोटी तोड़ना चाहते हैं। ये लोग कही न कही समाज को कलंकित कर रहे होते हैं अपने इन कारनामों से, क्यूंकि आपके ही आसपास कुछ ऐसे लोग भी हैं जो दिव्यांग होकर भी खुद को दुनिया का सबसे काबिल इन्सान मानते हैं।

आइये आज आपको एक ऐसी ही शख़्सियत की कहानी से रुबरु करवाने जा रहे हैं जो पैर में पोलियो होने की वजह से चल फिर नही सकता लेकिन फिर भी अपनी जीवन नईया चलाने के लिए सड़क किनारे अपनी ट्राई साईकिल पर ही छोटी सी दुकान चला रहा है। रजापुर के रहने वाले प्रमोद सागर जब 4 साल के थे तभी इनके पैर में पोलियो हो गया था।

नन्ही सी जान और इतना बड़ा हादसा इस इन्सान के लिए अपने भविष्य में अँधेरा होने जैसा था। माँ-बाप ने दंसवी फेल होने के बाद इनकी शादी कर दी। पैर में पोलियो और छोटी सी उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी इनके लिए पहाड़ साबित होने जैसे थी। अपनी शादी होने के बाद परिवार चलाने के लिए प्रमोद को दर-दर भटकना पड़ा।

दिव्यांग होने के चलते इन्हें अपनी पढ़ाई और नौकरी के दौरान कई जिल्लतें और तकलीफें झेलनी पड़ी। लोग ताने मारते थे और कमेन्ट भी करते थे। लेकिन समाज की इन ओछी हरकतों का प्रमोद पर कोई फर्क नही पड़ा। इन्होने अपने जीने का संघर्ष जारी रखा और कभी खुद से हार नही मानी। आख़िरकार इतना सब होने के बाद जीने की नई वजह ढूंढी और अपनी ही ट्राई साईकिल पर छोटी सी दुकान खोल ली।

करीब 18 साल से प्रमोद की जिन्दगी इसी छोटी सी दुकान से चल रही है। प्रमोद की एक 12 साल की स्वस्थ्य बेटी है जिसे ये काबिल बनाना चाहते हैं। अपनी इसी दुकान से इन्होने अपना घर भी खरीदा है नोएडा में छोटी सी दुकान भी है। प्रमोद का कहना है कि उन्होंने अपनी जिन्दगी में संघर्ष बहुत झेले हैं इसलिए अपने परिवार को किसी भी तकलीफ में नही देखना चाहते। वर्तमान में अपनी ट्राई साईकिल पर छोटी सी यही दुकान चलाकर सुकून भरी जिन्दगी जीना चाहते हैं। अपनी इस जिन्दगी को प्रमोद कोसते नही हैं क्यूंकि इनकी तकलीफों और परेशानियों ने इन्हें जीने की नई वजह दी है।

प्रमोद सागर की ये जिन्दगी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो दिव्यांग होकर खुद को कमजोर समझते हैं, या कुछ करना ही नही चाहते। हमारा गाजियाबाद की टीम प्रमोद सागर के इस ईमानदारी और संघर्ष भरे जीवन को सलाम करती है और आपसे भी अपील करती है कि यदि आपके शहर और जिलों में ऐसे लोग रहते हैं जो समाज के लिए प्रेरणा बने तो उनकी कहानी हमें hamaraghazibad100@gmail.com पर भेज दें। 

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