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सालों से विकास को तरसती हरसांव की धरती, क्या निगम चुनाव के बाद होगा इसका उद्धार

सालों से विकास को तरसती हरसांव की धरती, क्या निगम चुनाव के बाद होगा इसका उद्धार

गाज़ियाबाद। नगर निगम का चुनावी बाजार गर्म होने लगा है। नये नये प्रतिभागी पार्षद चुनाव की होड़ में शामिल होने लगे हैं। लिहाजा अब शहर के विकास की बात तो चुनाव के बाद होगी लेकिन कुछ मुद्दों पर चर्चा करना जरूरी है जिससे शायद चुनाव के बाद कुछ कॉलोनियो या इलाकों का भला हो जाए।

नगर निगम की आँखों से दूर और सालों से विकास को तरस रहे हरसांव की मौजूदा हालत बद से भी बदतर है। यहाँ विकास न के बराबर है, अगर कुछ है तो सिर्फ असुविधाएं, कच्ची सड़क, हर रोज उफतानी नालियाँ और कुछ भी नही। हमारा गाजियाबाद की टीम शनिवार को जब इस गाँव की यथा स्थिति देखने पहुंची तो इसकी कहानी बहुत ही दयनीय थी। पता चला कि यह नगर क्षेत्र में आता है इसलिए यह गाँव गोविंदपुरम के पार्षद अनिल कुमार के अंडर में है।

स्थानीय सूत्रों से जब हरसांव के विकास की बात की गई तो नतीजा ढाक के तीन पात निकला। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले 5 साल से पार्षद अनिल कुमार ने गाँव का विकास कराने के लिए इस ओर रुख तक नही किया है। हर रोज यहाँ चरमराती व्यवस्थाएं और गहराती समस्याओं की तरफ नगर निगम का ध्यान गया ही नही है।

हर रोज उफनाती नालियाँ, कच्ची सड़कें, सीवर ओवरफ्लो, कूड़े के ढेर, डेंगू से मरते बच्चे, दूषित पानी, खराब पड़े नल, जर्जर स्कूल, जगह-जगह गड्ढे और न जाने कितनी समस्याएं इस गाँव की बदहाली का सबूत हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में पार्षद अनिल कुमार ने इस गाँव के विकास के लिए बड़े-बड़े वादे किये थे लेकिन उसके बाद का नतीजा शून्य ही है।

कई बार इन सारी समस्याओं के लिए शिकायती पत्र दिए जा चुके हैं लेकिन नतीजा आज तक सकारात्मक नही दिखा। इन सारी समस्याओं का हल ने मिलने के कारण लोगों का जीना मुहाल हो चुका है। शिकायती पत्र देकर भी स्थानीय लोग पस्त हो चुके हैं। बताते चलें कि इस पूरे प्रकरण के बारे में जब पार्षद अनिल कुमार से बात की गई तो उनका मोबाइल नम्बर बंद मिला। फोन नम्बर बंद मिलना ही सारी कहानी और वास्तविकता बता रहा है कि चोर की दाढ़ी में तिनका है।

हरसांव की इस हालत की वजह चाहे जो हो लेकिन नगर निगम और पार्षद की लापरवाही उनके कारनामों पर कई सवाल खड़े करती है। सर्वविदित है कि नगर निगम चुनाव नजदीक हैं इसलिए आगामी नगर निगम चुनाव के बाद इस गाँव के विकास की नीव रखना बेहद जरुरी है क्यूंकि गाजियाबाद की जनता आश्वासन नही काम चाहती है।

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