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नही है कोई काम छोटा, बिहार के डॉक्टर का बेटा गाज़ियाबाद में बेच रहा ठेले पर चाय

नही है कोई काम छोटा, बिहार के डॉक्टर का बेटा गाज़ियाबाद में बेच रहा ठेले पर चाय

गाज़ियाबाद। इन्सान की जिन्दगी में कामयाबी हासिल करने की असीम सम्भावनाएं है, बस जरुरत होती है उसे गहराई से पहचाने की। इस दुनिया में पेट पालने के लिए ही सबलोग काम करते हैं फिर चाहे वो अम्बानी हों या फिर जूते सिलने वाला मोची। पेट की जरुरत ही इन्सान को पैसों तक खींचकर ले जाती है। बशर्ते पैसे कमाने के लोगों के नजरिये अलग-अलग जरुर होते हैं।

आइये इन्ही सारी जद्दोजहद को पारकर एक नई उम्मीद के साथ जीवन बिता रहे राम सिंह की कहानी से आपको रुबरु करवाते हैं। मूलरुप से बिहार के रहने वाले 58 साल के रामसिंह 22 साल पहले अपने घर से झगड़ा कर इस शहर में आये थे। बिहार में रामसिंह की अपनी एक कोठी है और पिता डॉक्टर हैं लेकिन पिता से अनबन के चलते और अपनी ही कुछ नासमझियों के कारण ये घर छोड़कर चले आये।

गाज़ियाबाद शहर में आने के बाद अपने परिवार का पेट पालने के लिए इन्होने कई जगह नौकरी की, लेकिन बचपन से खुद्दार और डॉक्टर का बेटा होने के नाते नौकरी रास नही आई। घर अपनी गलतियों की वजह से छोड़ा इसलिए फिर से वापस लौटकर जाना नही चाहते थे। आखिरकार हापुड़ चुंगी जाने वाले मार्ग पर सड़क किनारे झुग्गी डालकर रहने लगे और जीवन नैया चलाने के लिए ठेले पर छोटी सी दुकान चलाने लगे।

रामसिंह को अपनी गलती पर पछतावा तो बहुत हुआ लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। रामसिंह खुद को गरीब नही मानते क्यूंकि इनके लिए कोई भी काम छोटा या बड़ा नही है। बस खुद के अंदर ईमानदारी हो और जमीर कुछ गलत करने की इजाजत न दे तो ये जिन्दगी बड़ी शान से गुजर जाती है। रामसिंह के तीन बच्चे हैं जिनमे एक लड़के की शादी हो चुकी है और दो बच्चे अभी अपना भविष्य बनाने में लगे हुए हैं।

पिछले 22 वर्षो से ठेले पर छोटी सी दुकान चला रहे रामसिंह ने अपने बेटे की शादी भी अपनी दुकान की कमाई से ही की है। ख़ास बात ये कि न कोई दहेज़ लिया और न किसी से उधारी मांगी। वर्तमान में न तो इनका बैंक में कोई कर्जा है और न ही ज्यादा बैंक बैलेंस। रामसिंह बताते हैं कि 58 साल की ज़िन्दगी युहीं खुद्दारी से गुजार दी हैंऔर आगे भी चलती रहेगी। ऊपर वाला चाहेगा तो सबकुछ हमेशा अच्छा रहेगा।

हमारा गाजियाबाद की टीम रामसिंह के इस सुकून और ईमानदारी भरे जीवन को सलाम करती है और आपसे भी अपील करती है कि यदि आपके शहर, मोहल्ले, गाँव के आसपास भी ऐसे लोग रहते हो तो उनकी कहानी हमें hamaraghazibad100@gmail.com पर भेज दें। 

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