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अपना वर्तमान को सुधारने के लिए देश का भविष्य दांव पर नहीं लगा सकता – नरेंद्र मोदी

अपना वर्तमान को सुधारने के लिए देश का भविष्य दांव पर नहीं लगा सकता – नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली | नोट बंदी के बाद देश की जीडीपी में कैश का अनुपात 9 प्रतिशत पर आ तय है। नोटबंदी से पहले यह 12 प्रतिशत पर था। पिछली सरकार के दौरान ऐसा 6 साल में 8 बार हुआ है जब जीडीपी 5.7 प्रतिशत या उससे कम थी। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थ व्यवस्था को लेकर चल रही आलोचना का जवाब देते हुए कही। वे बुधवार को दिल्ली में इंस्टिट्यूट ऑफ़ कंपनीज सेक्रेटरीज ऑफ़ इंडिया (आईसीएसआई) के गोल्डन जुबली समारोह के दौरान लोगों को संबोधित किया।

पीएम मोदी ने कहा कि कुछ लोगों को निराशा फैलाए बिना नींद नहीं आती। ऐसे लोगों की पहचान हमने कर ली है। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आने वाली तिमाहियों में आरबीआई ने 7.7 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाया है। उन्होंने कहा कि 3 वर्षों में हमने 7.5 प्रतिशत की औसत वृद्धि हासिल की है। हालांकि उन्होंने माना कि विकास दर अप्रैल से जून के बीच घटी है, लेकिन सरकार इसे दुरुस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछली सरकार में मुद्रास्फीति जीडीपी वृद्धि से अधिक थी, उस समय ऊंची महंगाई, राजकोषीय घाटा व चालू खाते का घाटा सुर्खियां बनते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि दहाई अंक तक पहुंची मुद्रास्फीति घटकर तीन प्रतिशत से कम रह गई है, चालू खाते का घाटा कम होकर 2.5 प्रतिशत रह गया और राजकोषीय घाटा कम होकर 3.5 प्रतिशत पर आ गया।

मोदी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए सुधार प्रक्रिया जारी रहेगी। नए जीएसटी सिस्टम पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद से बाधाओं, तकनीकी दिक्कतों की समीक्षा करने को कहा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जीएसटी में किसी भी तरह की अड़चन को दूर करने के लिए बदलावों को तैयार है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनावी फायदे के लिए ‘‘रेवड़ियां’’ बांटने की बजाए उन्होंने सुधार एवं आम लोगों के सशक्तिकरण का कठिन रास्ता चुना है और वह ‘‘अपने वर्तमान के लिए देश का भविष्य दांव पर नहीं लगा सकते।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को मजबूत बनाने का उन्होंने कठिन रास्ता चुना है जो सुधार और आम लोगों के सशक्तिकरण पर बल देने वाला है। इस मार्ग पर चलना कठिन है और मेरी आलोचना भी हो रही है।

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