ताज़ा खबर :
prev next

शाबाश गाज़ियाबाद: कभी खुद के ही चेहरे से डरने वाली अर्चना आज दिखा रही शोषित महिलाओं को आईना

शाबाश गाज़ियाबाद: कभी खुद के ही चेहरे से डरने वाली अर्चना आज दिखा रही शोषित महिलाओं को आईना

गाज़ियाबाद। इस दुनिया में अगर सबसे खूबसूरत चीज अगर कुदरत ने बनाई है तो वो है इंसानी चेहरा। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक बस हम आईने का सामने खड़े होकर खुद को दूसरों से सुन्दर मानने में लगे रहते हैं। ये कहीं न कहीं सच भी है क्यूँकी ये दिखावे की दुनिया यही चाहती भी है।

इसी क्रम में आइये मिलाते हैं आपको उस दबंग लेडी से जिसने अपनी पहाड़ सी जिन्दगी से निकलकर जीने की नयी वजह ढूंढी और आज गाज़ियाबाद की उन महिलाओं के लिए ताकत बनी हुई हैं जो दहेज़,यौन उत्पीड़न, एसिड अटैक जैसी यातनाओं से पीड़ित हैं। वर्तमान में पिछले करीब डेढ़ साल से ये आशा ज्योति केंद्र में बतौर फील्ड काउंसलर काम कर रही हैं और महिलाओं की मसीहा बनी हुई हैं।

मूलरूप से बिहार के रहने वाली अर्चना त्यागी की कहानी आपको झकझोर कर रख देगी। महिलाओं की ताकत बनी अर्चना की जिन्दगी में मुश्किलों का तूफ़ान उस वक्त ही आ गया था जब ये महज 10 साल की थीं। चेहरे पर हल्की मुस्कान और जज्बा लिए अर्चना बताती हैं कि होली के दिन घर में रखे स्टोव के फटने से इनका आधा शरीर बहुत ज्यादा जल गया। इस दर्दनाक हादसे में इनका पूरा चेहरा खराब हो चुका था।

जिस उम्र मे माँ-बाप अपने बच्चों के भविष्य के सपने देखते हैं उस उम्र में इतना बड़ा हादसा अर्चना की जिन्दगी में अँधेरा होने जैसा था। इनका चेहरा जलने के बाद इतना डरावना हो गया कि परिवार के लोग इन्हें घर के बाहर नहीं निकलने देते थे। इतना कुछ होने के बाद अर्चना को एक पल के लिए ऐसा लगने लगा कि शायद ही इनकी जिंदगी को समाज स्वीकार करेगा। छोटी सी ही उम्र में तमाम जिल्लतें, ताने, उलाहने और समाज की ओछी सोच को झेलने के बाद अर्चना की माँ ने इनका साथ दिया।

क्यूंकि ऐसी मुश्किल घड़ी में दुनिया और रिश्तेदार भले ही आपको दरकिनार कर दें लेकिन जिसने आपको नौ महीने कोख में पाला हो वो आपका साथ कभी नही छोड़ सकती। माँ की प्रेरणा, प्रोत्साहन और उत्साह से अर्चना को इस दुनिया से लड़ने का तरीका मिला और बचपन से लेकर आज तक समाज से लड़ती चली आई। माँ की ही मदद से मास्टर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई पूरी करने के बाद आज अर्चना समाज सेवा कर महिलाओं के लिए मिसाल बनी हैं।

अपनी पहाड़ सी जिन्दगी को इतनी बखूबी पार करने का बाद अर्चना को इनकी सबसे ख़ास दोस्त प्रियांजलि का भी साथ मिला हुआ है जो हर वक्त ढाल बनकर इनके साथ रहती हैं। एक सुखी महिला की तरह अर्चना के भी अपने शौक हैं इसलिए अर्चना ने पार्लर और म्यूजिक का भी कोर्स कर रखा है। खुद का चेहरा बिगड़ जाने के बाद दूसरों को संजाने-संवारने का शौक अपने आप में एक मिसाल कायम करने वाली बात है।

पार्ट टाइम में इन्हें जब भी मौका मिलता है अर्चना लड़कियों का मेकअप करती हैं। खास बात ये कि अर्चना का एक हाथ खराब होने के बावजूद ये फर्राटे से स्कूटी भी चलाती हैं। भले ही अर्चना ने अपनी जिंदगी में बहुत सारी मुश्किलें झेली हों लेकिन आज वो ख़ुश हैं क्यूंकि उन्हें हमेशा से यकीन रहा कि रात ढलने के बाद एक नयी सुबह होती है जो जीवन जीने के नए तरीके बताती और सिखाती है।

हमारा गाज़ियाबाद की टीम अर्चना के इस संघर्ष भरे जीवन को सलाम करती है। 

हमारा गाज़ियाबाद के एंड्राइड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैंआप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो भी कर सकते हैं।