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शाबाश गाज़ियाबाद: खुद के सपने टूटे तो अपने भाई-बहनों को काबिल बनाने के लिए करने लगीं नर्सरी का काम

शाबाश गाज़ियाबाद: खुद के सपने टूटे तो अपने भाई-बहनों को काबिल बनाने के लिए करने लगीं नर्सरी का काम

गाज़ियाबाद।  कहा जाता है कि बेटियां घर की रौनक होती हैं, लड़कियों के बगैर घर का आंगन सूना सा होता है। मां की प्यारी और पापा की दुलारी होती हैं बेटियां। लेकिन समाज के कुछ लोग जो आज भी पुराने ख्यालात को छोड़ पाने में असमर्थ है, और बेटी को बोझ समझ केवल घर के कामों को सिखाते हैं और बड़ी होते ही उसकी शादी कर देते हैं।

ना तो उन बच्चियों से पढ़ने की  कोई बात पूछी जाती है और न सपने, मोम की गुड़िया बनी लड़की बड़ी होने से पहले मायका और शादी के बाद ससुराल को संभालती है, लेकिन अब समय बदल गया है । पुराने ज़माने  के मनोवृतियों को दूर करती हुई आज की लड़कियां हर वो काम करने का जज्बा रखती है जो लड़के कर सकते हैं। आज की लड़कियां, लड़कों के कदम से कदम मिलाकर चल रही है। ऐसे में हापुड़ चुंगी मोड़ पर नर्संरी का काम करने वाली योगीता ने न केवल बेटी के बोझ होने के तुच्छ विचार रखने वाले सोए लोगों को जगाया है बल्कि अपने को कमजोर और मजबूर समझने वाली लड़कियों को नई राह दिखाई है।

हापुड़ चुंगी मोड़ पर नर्सरी का काम करने वाली योगिता भले ही कम पढ़ी लिखी है लेकिन उसने अपने आपको माता-पिता पर बोझ नहीं बनने दिया । ये पांच बहन और एक भाई है और योगिता उनमें तीसरे नंबर पर है ।  इनके माता-पिता सब्जी उपजाने का काम करते हैं । छठवीं कक्षा तक पढ़ी  योगीता नर्सरी के काम से न केवल अपने माँ-पापा को आर्थिक रूप से सहयोग दे रही है बल्कि अपने  भाई -बहनों को भी पढ़ा रही है । ये

हमारा गाज़ियाबाद की टीम ने अब उनसे पढाई छोड़ने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उनकी माँ ने उन्हें मामा के घर पढने के लिए भेजा था, लेकिन वहां भी उनसे काम करवाया जाता था ।  काम के साथ पढाई न कर पाने के कारण वे छठवीं कक्षा में फेल हो गई, तबसे उन्होंने पढाई छोड़  दी और माँ के साथ घर के कामों में हाँथ बटाने लगी । धीरे-धीरे  उन्होंने खेती का काम करना शुरू किया और बाद में नर्सरी का काम करने लगी ।

आगे उन्होंने बताया की काफी उम्र होने के बाद भी उनकी बड़ी दीदी की शादी अभी नहीं हुई है, इसलिए घर में इनकी शादी को लेकर इनके माता – पिता की चिंता हमेशा बनी रहती है । अपने  माता-पिता पे ये बोझ न बने इसलिए इन्होंने नर्सरी का काम शुरू किया, जिसमे इनकी माँ ने इनका पूरा सहयोग किया। नर्सरी का काम केवल यही नहीं बल्कि इनकी बड़ी बहन भी करने लगी । दोनों  बहने मिलकर माता पिता का आर्थिक रूप से सहयोग करने के साथ अपने छोटे  भाई -बहनों को भी पढ़ा रही  हैं ।

इनका कहना है कि लड़कियां बोझ नहीं होती, इन्होंने हमेशा घर में लड़कों का फर्ज अदा किया है। ये किसी से डरती नहीं है बल्कि हर मुश्किलों का डटकर सामना करती हैं। अभी नर्सरी का काम करने वाली  योगीता शादी  के बाद केवल घर में नहीं रहना चाहती, इनका सपना एक कोस्मेटिक की  दुकान खोलना है ।

आगे इन्होंने बताया कि अपनी जिन्दगी से इन्होंने कभी हार मानना नहीं सीखा, ये अपने छोटे भाई-बहनों  को भी हमेशा आगे बढ़ते रहने और कुछ कर दिखाने की हिदायत देती हैं । इनके माता-पिता को भी इनपर गर्व है । कम पढ़ा -लिखा होने के बावजूद भी इन्होंने  कभी अपने आप को कमजोर नहीं समझा और हमेशा आगे बढ़ती रही।

हमारा गाज़ियाबाद की टीम इनके जज्बे को सलाम करती है और आपसे ये अपील करती है की आप भी बेटियों को बोझ न समझे और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने में मदद करें ।

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By प्रगति शर्मा : Thursday 26 अप्रैल, 2018 01:56 AM