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बसपा नेता दीपक भरद्वाज हत्याकांड के आरोपी बाबा प्रतिभानंद को गाज़ियाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

बसपा नेता दीपक भरद्वाज हत्याकांड के आरोपी बाबा प्रतिभानंद को गाज़ियाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

गाज़ियाबाद। दिल्ली के अरबपति और बसपा नेता दीपक भारद्वाज की हत्या के मुख्य आरोपी महंत प्रतिभानंद को पुलिस ने शुक्रवार रात को गाजियाबाद के सिहानी गेट इलाके से गिरफ्तार कर लिया। बसपा नेता दीपक भारद्वाज की मार्च 2017 में हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में दीपक भारद्वाज के बेटे और उनके जानकार वकील को पहले ही गिरफ्तार किया था।

पुलिस के अनुसार, दीपक के बेटे ने ही संपत्ति विवाद में उनकी हत्या कराई थी। दीपक भारद्वाज का करीब 500 करोड़ रुपये की संपत्ति का विवाद था। साजिश में शामिल वकील भी प्रॉपर्टी का काम करता था। पुलिस का आरोप है कि, महंत प्रतिभानंद ने ही इस मामले में सुपारी ली थी। तभी से महंत प्रतिभानंद फरार था और बाबा का भेष बनाकर रह रहा था। पूछताछ में पता चला कि बाबा ही महंत प्रतिभानंद है और वह हत्या के मामले में वांछित है।

 प्रॉपर्टी विवाद में की गई थी बसपा नेता की हत्या

गौरतलब है कि 2013 में एक स्कोडा कार में सवार दो लड़कों ने बसपा नेता दीपक भारद्वाज की राजौरी इलाके में बने उनके 34 एकड़ के फॉर्महाउस में घुसकर हत्या कर दी थी। ये पूरी वारदात एक सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई थी। इस मामले में पुलिस बसपा नेता के छोटे बेटे नीतेश और उसके एक जानकार वकील बलजीत सहरावत को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस ने दावा किया था कि, नीतेश ने ही पांच करोड़ की सुपारी देकर अपने पिता की हत्या करवाई। पुलिस ने मर्डर में इस्तेमाल होने वाली पिस्तौल भी रोहतक की नहर से बरामद कर लिया था।

 

बाबा बनाना चाहता था आश्रम

सूत्रों के अनुसार, कुछ आश्रमों से बाहर निकाले जा चुके प्रतिमानंद के मन में अपना खुद का आश्रम बनाने की इच्छा थी। इसके लिए स्वामी को धन की जरूरत थी और पिछले 18 महीने से वह हरिद्वार, करनाल और सोलन में जमीन की तलाश कर रहा था।

स्वामी को आश्रम खोलने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये इकट्ठे करने थे और इसके चलते कथित तौर पर अरबपति भारद्वाज की हत्या में स्वामी की संलिप्तता रही। उसने भारद्वाज की हत्या के लिए अपने ड्राइवर पुरुषोत्तम और उसके दोस्तों का इस्तेमाल किया। सूत्रों के अनुसार भारद्वाज की हत्या की सुपारी कुल चार करोड़ रुपये में दी गयी और प्रतिमानंद को इसके लिए दो करोड़ रुपये का हिस्सा मिलना था।

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