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जीडीए में भ्रष्टाचार के चलते हजारों की जान खतरे में, कभी भी हो सकता है हादसा

जीडीए में भ्रष्टाचार के चलते हजारों की जान खतरे में, कभी भी हो सकता है हादसा

गाज़ियाबाद | शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण से पहले या फिर किसी भी इमारत के ढाँचे में फेरबदल से पहले उसका नक्शा पास कराया जाता है। गाज़ियाबाद में यह काम गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण के जिम्मे है। मगर प्राधिकरण में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते अधिकांश जगहों पर बिना नक्शा पास कराये ही बिल्डिंग बन रही हैं या उन पर अतिरिक्त फ्लोर बनाए जा रहे हैं।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण संजय नगर, विजय नगर, लाल क्वार्टर, लाजपत नगर जैसे इलाके हैं जहाँ जीडीए ने एक मंजिला या बहुमंजिला फ्लैट्स बना कर बेचे थे। दशकों पहले बसाई गई इन कॉलोनियों में अब अधिकांश मकान मालिकों ने अपनी छतों पर अतिरिक्त मंजिले बना ली हैं। बहुतों ने तो अपने फ्लैट की छतें बिल्डरों को बेच भी दी हैं।

अतिरिक्त मंजिले बनाने के लिए न तो जीडीए से नक्शा पास कराया जाता है और न ही बिल्डिंग के स्ट्रक्चर की जांच होती है। बरसों पहले बनी इन बिल्डिंग्स की नींव एक मंजिला, दुमंजिला या तिमंजिला इमारतों के हिसाब से बनाई गई थी। मगर अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण की वजह से अब इन इमारतों की नींव भारी दबाव झेल रही है। अधिकांश मकानों की नींव धंस रही है और निचली मंजिल पर बने फ्लैट्स की दीवारों में दरारें आ गई हैं।

“हमारा गाज़ियाबाद” को हर रोज ऐसी दर्जनों शिकायतें मिल रही हैं जहाँ निचली मंजिल में रहने वाले लोग जीडीए में शिकायत करने जाते हैं मगर सुनवाई न होने के कारण वापस लौट आते हैं। बहुत से मामलों में जीडीए कुछ जुरमाना लगा कर मकान का नक्शा पास कर देता है। मगर शायद ही कोई ऐसा मामला हो जहाँ प्राधिकरण ने अतिरिक्त मंजिले बनाने से पहले इमारत की नींव या निचली मंजिलों की दीवारें मजबूत करने के आदेश दिए हों।

हमने जब छत पर अतिरिक्त मंजिलें बना रहे कुछ भवन स्वामियों से बात की तो पता चला कि जीडीए के इंजीनियर से लेकर पुलिस चौकी तक सब के रेट फिक्स हैं। जीडीए के कर्मचारी हर मंजिल पर मकान बनाने के लिए ₹20 हज़ार, नगर पालिका और पुलिस चौकी पर तैनात कर्मचारी ₹10-10 हज़ार लेकर अनुमति दे देते हैं। संजय नगर जैसे अधिक विकसित क्षेत्र में रिश्वत का भाव ₹ 50 हज़ार तक पहुँच जाता है।

कहने की जरूरत नहीं कि गाज़ियाबाद और दिल्ली समेत सारा एनसीआर क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से रेड ज़ोन में आता है। कुदरत के हल्के से झटके से कभी भी ये इमारतें ताश के पत्तों के महल की तरह ढेर हो सकती हैं। ऐसे में जान-माल के नुकसान की जिम्मेदारी न तो गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण लेगा और न ही प्रदेश प्रशासन।

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