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अब विभागों में जल्दी होगा शिकायतों का समाधान, यूपी में सभी विभागों को ई-ऑफिस से जोड़ा जायेगा

अब विभागों में जल्दी होगा शिकायतों का समाधान, यूपी में सभी विभागों को ई-ऑफिस से जोड़ा जायेगा

लखनऊ। शासन प्रशासन को दुरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने एक जनवरी 2018  से सभी जिला मुख्यालयों को ई-ऑफिस व्यवस्था से जोड़ने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि, सभी विभागों को भी ई-ऑफिस से जोड़ा जाए। इससे पहले राज्य सचिवालय में एक अक्तूबर से ही ई-ऑफिस व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को शास्त्री भवन में ई-ऑफिस प्रणाली लागू किए जाने के संबंध में प्रजेंटेशन देखने के दौरान ये निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली से पारदर्शिता आएगी और काम तेजी से होंगे। उन्होंने इस सिस्टम को सफल बनाने के लिए कर्मचारियों, अधिकारियों व मंत्रियों को प्रशिक्षण दिलवाने को कहा ताकि इसका सही ढंग से इस्तेमाल हो सके। प्रजेंटेशन के दौरान उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। प्रमुख सचिव (सचिवालय प्रशासन) महेश कुमार गुप्ता ने बताया कि, ई-ऑफिस को लेकर तेजी से तैयारियां चल रही हैं।

सचिवालय के 95 विभागों के 455 अनुभागों में एक अक्तूबर से ई-ऑफिस व्यवस्था लागू हो रही है। पारदर्शी प्रशासन में इस पहल को मील का पत्थर माना जा रहा है। सचिवालय के 4 हजार कर्मियों को इस प्रणाली का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए कंप्यूटर, स्कैनर, प्रिंटर आदि की भी व्यवस्था की जा रही है। कागज और फाइलों से प्रदेश को चलाने वाले मंत्री भी अब कंप्यूटर से राज चलाएंगे। मंगलवार को मुख्यमंत्री व उनके मंत्रियों को ई-ऑफिस पर काम के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

ई-ऑफिस सिस्टम में प्रार्थना पत्रों पर आदेश-निर्देश से लेकर नीतिगत मामलों तक अपने निर्देश और टिप्पणियां मंत्रियों को खुद ही देनी होंगी। इसके लिए उन्हें लॉगइन आईडी और पासवर्ड दिए जाएंगे।

शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई मंत्री पहले से ही कंप्यूटर पर काम करते आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई मंत्री खासे सक्रिय हैं। ऐसे में इन्हें ई-ऑफिस से काम में कोई मुश्किल नहीं आने वाली। मैनुअल सिस्टम में बड़ी संख्या में रोज आने वाली शिकायतों, पत्रों पर कार्रवाई का स्तर पता करना बेहद कठिन है। ई-सिस्टम से हर मामले पर की जा रही कार्रवाई एक क्लिक से पता हो सकेगी।

गौरतलब है कि, मुख्यमंत्री ने हर काम के लिए समय सीमा तय कर रखी है, लेकिन इस पर अमल के आकलन की कोई व्यवस्था नहीं है। नए सिस्टम में काम की टाइमलाइन पास होते ही वरिष्ठ अधिकारियों को पता चल जाएगी। नई व्यवस्था में आरटीआई का जवाब चंद मिनटों में ही दिया जा सकेगा। बड़ी संख्या में कागज की बचत होगी। न तो डॉक्यूमेंट चोरी हो सकेंगे और न ही जलाए जा सकेंगे।

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