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नहीं कामयाब है गाज़ियाबाद में डिजिलॉकर, लालफीताशाही के कारण अधर में अटकी प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण योजना

नहीं कामयाब है गाज़ियाबाद में डिजिलॉकर, लालफीताशाही के कारण अधर में अटकी प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण योजना

गाज़ियाबाद | डिजिटल लॉकर या डिजिलॉकर, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का अहम हिस्सा है। भारत सरकार के संचार और आईटी मंत्रालय के द्वारा प्रबंधित इस वेबसाईट आधारित सेवा के जरिये उपयोगकर्ता जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र जैसे अहम दस्तावेजों को ऑनलाइन सुरक्षित रख सकते हैं। यह सुविधा पाने के लिए बस उपयोगकर्ता के पास भारत सरकार द्वारा प्रद्दत आधार कार्ड होना चाहिए। अपना आधार अंक डाल कर उपयोगकर्ता अपना डिजिलॉकर खाता खोल सकते हैं। डिजिटल लॉकर की सबसे बड़ी सुविधा ये है कि उपयोगकर्ता कहीं से भी और कभी भी अपने दस्तावेजों को इसके जरिए जमा कर सकते हैं। उन्हें निशुल्क सुरक्षित रख सकते हैं, किसी भी सरकारी काम जहाँ दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियाँ देना अनिवार्य होता है वहाँ मूलप्रति या उसकी छायाप्रति देने की बज़ाय अपने लॉकर का यूआरएल दे सकते हैं। अधिकारी वहाँ से इन प्रमाणपत्रों को देख सकते हैं। इस तरह से आपको को हर जगह अपने ज़रूरी दस्तावेज लेकर घूमने की जरूरत नहीं है।

मगर उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग और राज्य की NIC इकाई की लाल फीताशाही के चलते गाज़ियाबाद समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों के रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं हैं। इसलिए प्रधान मंत्री मोदी की यह योजना फ़िलहाल उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए बेकार साबित हो रही है। हमने जब इस सम्बन्ध में गाज़ियाबाद परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों से बात की तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमने केंद्र सरकार के NIC विभाग को सारा डाटा दे दिया है, देरी उन्हीं की ओर से है। अब चाहे कारण कोई भी रहा हो, अंततः हम उत्तर प्रदेश के निवासियों को डिजिलॉकर योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

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