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अब बेमौत नहीं मारे जाएंगे आर्मी से रिटायर्ड हुए कुत्ते..

अब बेमौत नहीं मारे जाएंगे आर्मी से रिटायर्ड हुए कुत्ते..

नई दिल्ली। सरकार ने आर्मी डॉग्स के लिए ओल्ड-एज होम खोला है। कुत्ते अब रिटायर होने के बाद भी जिंदगी जी सकेंगे। और इसके बाद वो ओल्ड-एज होम में रह सकेंगे जिसे कुछ समय पहले सरकार ने आर्मी डॉग्स के लिए खोला है। आर्मी में 1 हजार से ज्यादा कुत्ते हैं जिनमें सबसे ज्यादा संख्या लैब्राडोर, जर्मन शेफर्ड और बेल्जियन मैलिनॉयस हैं।

कुछ साल पहले तक रिटायर होने के बाद इन कुत्तों को गोली मार दी जाती थी या इच्छामृत्यु दी जाती थी, पहले चोट या बीमारी के कारण रिटायर हुए कुत्तों के साथ ऐसा ही किया जाता था, जब तक कि उन्होंने वीरता पुरस्कार नहीं जीते हों, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

एक आर्मी अफसर ने बताया कि, सभी सर्विस कुत्तों को रिटायर होने के बाद भी पहले की ही तरह प्यार मिलता रहेगा। उन्होंने बताया कि हम इन कुत्तों की नीलामी के बारे में भी सोच रहे हैं, जो लोग इनसे जुड़ाव महसूस करते हैं और इनका खर्च उठाने में जिन्हें परेशानी नहीं होगी वो इन्हें अडॉप्ट भी कर सकते हैं। एनएसजी के प्रवक्ता राकेश कुमार ने बताया कि देश में इन कुत्तों की नीलामी ठीक तरह से विज्ञापनों के द्वारा की जाती है।

हालांकि साथ ही उन्होंने बताया कि सभी कुत्तों की नीलामी नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि हमलावर कुत्ते, जिनका इस्तेमाल आतंकवादी विरोधी ऑपरेशंस में होता है उन्हें घरों में बच्चों के साथ नहीं रखा जा सकता। पिछले साल रिटायर कुत्तों के पुनर्वास के लिए एक एनजीओ की एक दलील की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया था, जिसके बाद यह ओल्ड-ऐज होम कुछ समय पहले मेरठ के वॉर डॉग ट्रेनिंग स्कूल में स्थापित किया गया है।

बता दें कि आर्मी के कुत्ते आमतौर पर 7-8 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं, जो उनकी उम्र का आधा है। आर्मी के अधिकारी ने बताया कि इन्हें अब केवल उसी स्थिति में मारा जाएगा जब मेडिकल तौर पर मौत अंतिम सहारा रह जाएगी।जानकारी के मुताबिक अमेरिका और ब्रिटेन में मिलिट्री डॉग्स को या तो ओल्ड- ऐज होम में रखा जाता है या फिर उन्हें रिटायर हुए मिलिट्री अफसरों द्वारा गोद ले लिया जाता है।

साल 2016 में हुए पठानकोट हमले में एंटी- टेरर हमले का हिस्सा रहे रॉकी के लिए लेना मेडल की सिफारिश की गई थी। उन्होंने बताया कि अवॉर्ड जीतने वाले कुत्तों को प्रति माह 15,000 से लेकर 20,000 रुपये दिया जाता है जिससे उनके खाने से लेकर सेहत पर खर्च किया जा सकता है।

 

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By सत्याभा : Tuesday 26 सितंबर, 2017 18:27 PM