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जीवन चलाने के लिए आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण लेना भी जरुरी: डॉ सूर्य प्रकाश

जीवन चलाने के लिए आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण लेना भी जरुरी: डॉ सूर्य प्रकाश

गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में आयोजित सेमिनार में आपदा और उसके प्रबंधन के तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने दो तकनीकी सत्रों में अपने विचार व्यक्त किये और बताया कि दिल्ली-एनसीआर पर प्राकृतिक आपदा का साया काफी गहरा है। अगर समय रहते कोई ठोस उपाय न किये गये तो हालात काफी खतरनाक हो सकते हैं। इसके लिए भारत सरकार को कोई ठोस नीति तो बनानी होगी ही साथ ही लोगों को जागरूक होना होगा।

दीप प्रज्ज्वलन से शुरू हुए सेमिनार में बतौर वक्ता डॉ अशोक कुमार गदिया ने कहा कि हमें गुजरात, केदारनाथ, मैक्सिको और जापान की आपदाओं को केन्द्र में रखकर प्रबंधन करना होगा। भूमाफिया अधिक लाभ कमाने की नीयत से जमीनों पर बेतरतीब निर्माण करके आपदाओं को असमय न्यौता देने में लगे हैं। इस दौरान डॉ सूर्य प्रकाश ने कहा कि संघर्ष में जीना ही जीवन होता है। जिस प्रकार हम शिक्षा के बाद करियर बनाने के लिए किसी विशेष विधा में प्रशिक्षण लेते हैं उसी प्रकार जीवन को चलाने के लिए आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण लेना भी जरूरी है।

शहर तो बन रहे हैं लेकिन आपदा प्रबंधन नहीं हो पा रहा है। लोगों में इसके प्रति जागरूकता की कमी है। इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ अलका अग्रवाल ने कहा कि आपदा प्रबंधन आज बेहद जरूरी है। शहरों में भवन बनाकर बेचने का काम बिल्डर बहुत तेजी से कर रहे हैं लेकिन सुरक्षा के लिहाज से वे कितने टिकाऊ हैं इसे जांचना जरूरी है। हमें अपने जीवन को दांव पर लगाने से पहले अपने आसपास हो रहे बेतरतीब निर्माण को रोकना होगा। इसके लिए हमें जागरूक होना होगा। सेमिनार में इंस्टीट्यूशंस ऑफ़ इंजीनियर्स लोकल सेंटर के चेयरमैन डॉ एचएस शर्मा ने आमंत्रित वक्ताओं के अलावा सभी का स्वागत किया। सेमिनार का संचालन समन्वयक डॉ राजीव गोयल ने किया।

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