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भष्टाचार और भूमाफिया – डीएम ऋतु महेश्वरी के लिए होंगी सबसे बड़ी चुनौती

भष्टाचार और भूमाफिया – डीएम ऋतु महेश्वरी के लिए होंगी सबसे बड़ी चुनौती

गाज़ियाबाद | स्वास्थ्य कारणों से डीएम मिनिस्ती एस एक महीने की लम्बी छुट्टी पर चली गईं। यह घोषणा ठीक उसी दिन हुई जिस दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाज़ियाबाद में मौजूद थे। दुर्भाग्य की बात है कि, एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी का अचानक इस तरह से चले जाना स्थानीय मीडिया के लिए मात्र एक खबर बन कर रह गया। शायद ही किसी ने यह जानने की कोशिश की हो कि, आखिर ऐसा क्या हुआ जो डीएम मिनिस्ती एस ने एकाएक गाज़ियाबाद छोड़ने का निर्णय ले लिया।

दरअसल एक आईएएस के रूप में अपने अब तक के कार्यकाल के दौरान मिनिस्ती एस ने कभी भी हार नहीं मानी है। चाहे वह मुलायम सिंह के गढ़ में हथियारों के कारोबार को बंद करने का मामला हो या फिर गोरखपुर बॉर्डर पर हो रही मानव तस्करी पर लगाम कसना, उन्होंने हमेशा ही नियम और कानून के दायरे में रहकर हर गलत काम को रोकने का प्रयास किया है। वे चाहती तो शांत रहकर मलाईदार जिले के रूप में मशहूर गाज़ियाबाद में जितना समय चाहे गुज़ार सकती थी। मगर उन्होंने काजल की इस कोठरी में रहने के बजाय गाज़ियाबाद छोड़ने में ही अपनी भलाई समझी।

गाज़ियाबाद में आते ही यहाँ भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया। किसानों को दिए जाने वाले मुआवजों में हो रहे भ्रष्टाचार को ख़त्म करते हुए मिनिस्ती एस ने अपने छोटे से कार्यकाल में रिकॉर्ड मुआवजे बांटे। यही नहीं, उन्होंने अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत से बंट रहे फर्जी मुआवजों पर भी लगाम लगाईं, दर्जनों मुकदमें दर्ज कराये। अतिक्रमण और भू-माफिया के खिलाफ भी उनकी लड़ाई जग जाहिर है। उन्हें लगातार एक के बाद एक क्षेत्र का दौरा कर करोड़ों की सरकारी संपत्ति को भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया। शायद उनका यह तेज़ तर्रार रवैया गाज़ियाबाद के कुछ नेताओं, अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को रास नहीं आ रहा था। तभी तो वे लगातार मिनिस्ती एस के तबादले का प्रयास कर रहे थी।

स्थानीय छुटभैये नेताओं को एक बहुत बड़ी शिकायत थी कि मिनिस्ती एस उनके फोन नहीं उठाती हैं या उठाती भी हैं तो उस पर कोई कार्यवाही नहीं करती। वे शायद भूल बैठे थे कि, मिनिस्ती एक आईएएस अधिकारी हैं, इन नेताओं की निजी सचिव नहीं। गाज़ियाबाद की आम जनता को शायद ये भी न मालूम हो कि, मिनिस्ती एस भले ही नेताओं के फोन न उठाती हों, मगर उन्होंने ने सिर्फ एक फोन कॉल पर न जाने कितने जरूरतमंदों और पीड़ित महिलाओं की मदद की है। यही नहीं मिनिस्ती एस ने जिला विकास अधिकारी की मदद से कई महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जिसके जरिए समाज के उस हिस्से को सम्मानपूर्वक जीने का अवसर मिला जिनपर इससे पहले शायद ही किसी अधिकारी की नज़र पड़ी हो।

गाज़ियाबाद हमेशा से ही सरकारी अधिकारियों का पसंदीदा जिला रहा है। और हो भी क्यों नहीं, जो काम प्रदेश के अन्य जिलों में हज़ार बारह सौ रुपये में हो जाते हैं, उसी के बदले में उन्हें यहाँ दस से बीस हज़ार रुपये मिल जाते हैं। यही नहीं, यहाँ मुआवजे के पैसों से रातों-रात अमीर हुए किसानों के साहबजादों को छोटे-मोटे अपराधों में पकड़कर उनसे लाखों रुपये वसूलना भी आम बात है। डीएम मिनिस्ती के रहते पुलिस और प्रशासन की इन सब हरकतों पर लगाम लग गया था। यही वजह थी कि गाज़ियाबाद में तैनात कुछ भ्रष्ट आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अधिकारियों की लॉबी भी उनके ट्रान्सफर के लिए दिन रात एक कर रही थी।

अब कारण भले ही कुछ भी हो, सच यह है कि जिले के वे भ्रष्ट अधिकारी जिनकी रोजी रोटी पर मिनिस्ती एस ने लात मारी थी, मिनिस्ती को जिलाबदर करने में कामयाब हो गए। मगर अफ़सोस की बात है कि, गाज़ियाबाद की आम जनता, जिसके अधिकार और सम्मान के लिए मिनिस्ती एस सरकार में रहते हुए भी सरकार से लड़ रहीं थी उनके जाने के बाद शांत बैठी है।

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