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शाबाश गाज़ियाबाद: मुश्किलों को दरकिनार कर सीखा जीने का तरीका, भेलपूरी बेचकर जी रहे शान की जिन्दगी

शाबाश गाज़ियाबाद: मुश्किलों को दरकिनार कर सीखा जीने का तरीका, भेलपूरी बेचकर जी रहे शान की जिन्दगी

गाज़ियाबाद। जिन्दगी के उतार-चढ़ाव के पार कर जो इन्सान शान की जिन्दगी जीना चाहता है उसके रास्ते मुश्किलें भी आने से कतराती हैं। सुख और दुख हम सब की जिन्दगी के एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। सुख में हमारी जिन्दगी अच्छी तरह गुजरती है लेकिन जब दुखों का पहाड़ टूटता है तो लगभग हर कोई हताश हो जाता है। लेकिन ये भी सच है कि इस दुःख के बाद जीवन की एक अच्छी सुबह होती है जिसे हमसब खुल कर जीना चाहते हैं।

आज हम आपको एक ऐसे सख्स की कहानी से रुबरु करवाने जा रहे हैं जो अपने चेहरे पर एक हल्की से मुस्कान लिए गाज़ियाबाद की सड़कों पर भेलपूरी बेंचते हैं। मूलरूप से इटावा का रहने वाले संदीप पिछले 10 साल से यही काम कर रहे हैं। शुरुआत से गरीबी का जीवन जी रहे संदीप ने कभी अपने काम से समझौता नही किया। संदीप का अपना एक हंसता-खेलता परिवार है और 4 भाई हैं। एक भाई इटावा में खेती करता है और अन्य दूसरे भाई इसी शहर में रहकर भेलपूरी बेचने का काम करते हैं।

संदीप बताते हैं कि इन्होने अपनी बहन की शादी भी भेलपूरी बेचकर ही की है। सोंचने वाली बात है कि एक सामान्य शादी में जहाँ लाखों खर्च होते हैं वहीँ केवल भेलपूरी बेचकर अपनी बहन की शादी करना कितना मुश्किल होगा। लेकिन इन्ही मुश्किलों को दरकिनार कर इन्होने जीवन जीने के नये तरीके खोजे और आज अपने इस काम से खुश हैं क्यूंकि गरीब होने के चलते इन्होने कभी ज्यादा पाने की चाहत नही की। इन्होने बताया की मुश्किलें सबकी जिन्दगी में आती हैं, इनकी जिन्दगी में भी आयीं, लेकिन उस वक्त खुद को ये तसल्ली दी कि ये बुरा वक्त है जल्द ही गुजर जाएगा।

संदीप कहते हैं कि हम न किसी की गुलामी करते हैं और न चोरी करते हैं और न ही हमे किसी का डर है। भले ही भेलपूरी बेचकर इतने पैसे न मिलते हों कि कोई बड़ी बिल्डिंग खड़ी हो जाए लेकिन इसका मतलब ये नही कि हम जीना छोड़ दें। आज नही तो कल कुछ अच्छा जरूर होगा, क्यूंकि हर अँधेरे के बाद उजाला आता है। चेहरे पर चिंतारहित मुस्कान लिए संदीप बताते हैं हम अपने कर्मों से पीछे नही हटना चाहते, बाकी कुछ अच्छा करना उस ऊपर वाले का काम है जो अदृश्य होकर सबकी मदद करता है।

संदीप की जिन्दगी उन लोगों के लिये प्रेरणा है जिनके पास सबकुछ होते हुए भी वो कुछ करना नही चाहते। समाज में ऐसे बहुत से उदाहरण हैं जिनमे लोग अपने कर्म पर नही किस्मत पर भरोसा करते हैं, जिन्दगी में थोड़ी सी मुश्किलें आने पर वो ख़ुदकुशी जैसे कदम उठा लेते हैं और अपने पीछे कायरता की निशानी छोड़ जाते हैं। हमारा गाज़ियाबाद की टीम संदीप के इस ईमानदारी भरे जीवन को सलाम करती है और आपसे भी अनुरोध करती है कि यदि आपके आसपास भी ऐसे लोग रहते हैं जो दूसरों के लिए प्रेरणा बने हों तो उनकी कहानी हमें hamaraghaziabad100@gmail.com पर भेज दें।

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