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सिस्टम में कमियों की सजा क्यों भुगते कारोबारी – राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र से किया सवाल

सिस्टम में कमियों की सजा क्यों भुगते कारोबारी – राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र से किया सवाल

जयपुर | जीएसटी पोर्टल के इस्तेमाल में कारोबारियों को आ रही दिक्कतों और जीएसटी के कुछ पेचीदा प्रावधानों को लेकर अब अदालतों ने भी केंद्र सरकार से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं। रजिस्ट्रेशन और माइग्रेशन फॉर्म में खामियों, संशोधन में दिक्कतें, ब्याज और जुर्माना, कंपोजिशन विंडो बंद करने, क्रेडिट के फॉर्म ट्रान-1 में गड़बड़ियों, एक्सपोर्टर्स का रिफंड रोकने सहित कई मसलों पर देश के कई राज्यों के उच्च न्यायालयों में रोजाना कोई न कोई अपील दाखिल हो रही है। ऐसे ही एक मामले में राजस्थान हाई कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि कंप्लायंस में आ रही तकनीकी दिक्कतों का नुकसान कारोबारी क्यों सहें? कोर्ट ने जटिल प्रावधानों की वैधता पर भी सरकार से जवाब मांगा है।

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स के जनरल सेक्रटरी संजय शर्मा ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद से तकनीकी और वैधानिक दिक्कतों को लेकर जैसे-जैसे अपीलें आ रही हैं, अदालतें सवाल उठाती जा रही हैं। दो महीने के भीतर जीएसटी की डेट तीन बार बढ़ाया जाना इसका संकेत है कि सरकार और उसके सिस्टम की तैयारी ठीक नहीं थी। राजस्थान हाई कोर्ट ने इस अपील पर केंद्र से एक हफ्ते में जवाब मांगा है कि जब आपका सिस्टम तैयार नहीं था तो कारोबारियों पर ‘क्लिनिकल ट्रायल’ क्यों थोपा गया।

दिल्ली हाई कोर्ट में भी लगातार याचिकाएं दाखिल हो रही हैं, जिनमें से ज्यादातर तकनीकी खामियों के चलते व्यापारियों को हो रहे नुकसान के खिलाफ आ रही हैं। जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस एम प्रतिभा सिंह की बेंच ने निर्यातकों की याचिका पर सरकार से जवाब मांगा है कि जीरो रेटेड सप्लाई पर टैक्स नहीं चुकाने के लिए कोई कारोबारी बैंक गारंटी या बॉन्ड क्यों जमा करे? कारोबारियों की ओर से इस बात पर भी आपत्ति जताई गई है कि इस नियम के दायरे में 1 करोड़ टर्नओवर से कम के असेसी को ही रखा गया है, जबकि बड़े कारोबारियों को छूट दी गई है।

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