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ऑक्सीजन नहीं, स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं गाज़ियाबाद के सरकारी अस्पताल

ऑक्सीजन नहीं, स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं गाज़ियाबाद के सरकारी अस्पताल

गाज़ियाबाद | गोरखपुर और अन्य जिलों में सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौतों के बाद गाज़ियाबाद के सरकारी अस्पतालों में भी दवाइयों, ऑक्सीजन और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता के लिए जांच शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गाज़ियाबाद के किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन और जीवनरक्षक दवाओं की कोई कमी नहीं है।

आवश्यक सुविधाओं की कमी भले ही न हो लेकिन जिले के सभी सरकारी अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से अवश्य जूझ रहे हैं। यहाँ के विभिन्न अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टरों के 25 पद खाली पड़े हैं। यही नहीं अल्ट्रा साउंड स्पेशलिस्ट न होने के कारण अल्ट्रा साउंड मशीनें कई महीनों से धुल फांक रही हैं।

गाज़ियाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. के गुप्ता ने बताया कि एमएमजी अस्पताल, महिला अस्पताल और संजय नगर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल में सभी उपकरण सही काम कर रहे हैं और ऑक्सीजन के सिलिंडर भी पर्याप्त मात्र में हैं। साथ ही सभी सप्लायरों और ठेकेदारों को भी समय पर भुगतान किया जा रहा है। रिकार्ड्स के मुताबिक किसी भी ठेकेदार का पैसा नियमानुसार बकाया नहीं है।

लेकिन नाम न छापने की शर्त पर अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने बताया कि गाज़ियाबाद में कम से कम चार अल्ट्रासाउंड स्पेशलिस्ट की सख्त जरूरत है। स्पेशलिस्ट न होने के कारण लोनी, मुरादनगर, महिला अस्पताल और एमएमजी अस्पताल में लगी हुई अल्ट्रासाउंड मशीने बेकार पड़ी हैं। मजबूरी में मरीजों को महंगी कीमत चुकाकर बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस बार बजट में कटौती के कारण एम्बुलेंस और स्वास्थ्य विभाग की अन्य गाड़ियों के डीजल के लिए भी कम पैसा जारी हुआ है।

डॉक्टरों की कमी के बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि 100 बिस्तरों वाले संयुक्त अस्पताल में इस समय कोई भी एमडी (मेडिसिन) नहीं है। इसी तरह तीन महीने पहले एक सर्जन के ट्रान्सफर हो जाने के बाद अब यहाँ कोई भी पूर्णकालिक सर्जन उपलब्ध नहीं है। सर्जन न होने के कारण मरीजों को दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है।

बता दें कि गाज़ियाबाद के सरकारी अस्पतालों में इस साल अप्रैल से लेकर अगस्त माह के अंत तक प्रसूति के 25 हजार केस आये थे। जिनमें से 12 मामलों में प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की मौत हो गई। जबकि प्रसूति के दौरान मरने वाली महिलाओं का राष्ट्रीय औसत 150 महिलाएं प्रति 1 लाख का है। इस लिहाज से गाज़ियाबाद का रिकॉर्ड काफी अच्छा है। इसी तरह एमएम जी अस्पताल में अप्रैल से लेकर अगस्त माह के दौरान 19 की मृत्यु हो गई। इनमें से ज्यादातर मामले निमोनिया और फ़ूड पायजनिंग के थे।

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