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शाबाश गाज़ियाबाद: घर उजड़ जाने के बाद भी नही छोड़ा जीने का सहारा, चाय की दुकान चलाकर जी रहे बेफिक्र जिन्दगी

शाबाश गाज़ियाबाद: घर उजड़ जाने के बाद भी नही छोड़ा जीने का सहारा, चाय की दुकान चलाकर जी रहे बेफिक्र जिन्दगी

गाज़ियाबाद। जब इन्सान विपरीत परिस्तिथियों से निकलकर जीवन जीने के नये आयाम खोजता है तो उसके चेहरे की ख़ुशी देखने लायक होती है। सुख हो या दुख हर परिस्थिति में बस ऐसे लोग खुश रहना जानते हैं। और ये सच भी है कि हर परिस्थिति में खुश रहने वाला इन्सान दूसरों के लिए प्रेरणा बनता है।

इन्सान के ऊपर जब मुसीबतों का पहाड़ टूटता है तो वह हर तरह से टूट जाता है, आज हम आपको ऐसी ही शख्सियत से रूबरू करवाने जा रहे हैं जिसने मुसीबतों में भी हार नही मानी। ये कहानी है बम्हेटा के रहने वाले 80 वर्षीय गजेंद्र सिंह की जो पिछले करीब 40 वर्षों से बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र में छोटी सी ढाबली पर अपने खर्चे पूरे करने के लिए चाय बेचते हैं। लेकिन इनकी खास बात ये है कि जो लोग इनकी दुकान पर चाय पीने आते हैं उनसे ये पैसे नही लेते।

गजेंद्र सिंह की दर्द भरी कहानी आपको झकझोर कर रख देगी। गजेंद्र बताते हैं कि एक जमाना था जब इसी रोड पर इनका एक बड़ा सा मकान था, पैसों की कोई कमी नही थी। अच्छा कमाते थे और अच्छा रहन-सहन भी था। लेकिन साल 1962 में इनकी जिन्दगी की कहानी बदल गई। दरअसल इनका जो घर था वो सरकारी जमीन पर था, इसलिए इनका मकान तोड़ दिया गया और ये पूरी तरह से बेघर हो गए। कभी महल में रहने वाले गजेन्द्र की कहानी पूरी तरह पलट चुकी थी।

सबकुछ चले जाने के बाद गजेन्द्र सिंह के रोटी के लाले पड़ गये। लेकिन गजेन्द्र सिंह की किस्मत इनपर थोड़ी सी मेहरबानी कर गई। इनके बेटे इतने बड़े हो चुके थे कि इन्होने धीरे-धीरे सब सम्हाल लिया और इसी एरिया में एक फैक्ट्री के अंदर कम करना शुरू कर दिया। गजेन्द्र सिंह फैक्ट्री के बाहर ही चाय की दुकान खोलकर बैठ गए। दोनों बेटों के काम करने से इनकी जिन्दगी धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी। वर्तमान में गजेन्द्र सिंह अपनी चाय की दुकान पर बैठकर समाज सेवा कर रहे हैं।

गजेन्द्र सिंह का कहना है कि इन्हें घर पर खाली बैठना अच्छा नही लगता इसलिए बस अपनी जिन्दगी के बचे कुछ पल ईमानदारी से यहीं बैठकर बिता रहे हैं। दुनिया लाख ही स्वार्थ से भरी हो लेकिन हमारे समाज को ऐसे लोगों की आज भी जरूरत है। हमारा गाज़ियाबाद की टीम गजेन्द्र सिंह के इस जज्बे को सलाम करती है। 

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