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शाबाश गाज़ियाबाद : शिक्षा के साथ संस्कार भी दे रहे प्राथमिक विद्यालय बम्हैटा के अध्यापक

शाबाश गाज़ियाबाद : शिक्षा के साथ संस्कार भी दे रहे प्राथमिक विद्यालय बम्हैटा के अध्यापक

गाज़ियाबाद। कहा जाता है कि किसी भी बच्चे का पहला गुरू उसके माता-पिता होते हैं और उनके बाद आते हैं शिक्षक। जो हमे शिक्षा के साथ-साथ विद्या भी देते हैं और जीवन जीने के गुर सिखाते हैं। विद्यालय में पढ़ाई करना किसी भी बच्चे की जिन्दगी का वो पल होता है जब वो अपने उद्धेश्यों को पूरा करने के लिए पहली सीढ़ी चढ़ते हैं। हर दिन के चौबीस घंटे में से अधिकांश समय वो विद्यालय में ही बिताते हैं। इसलिये ये आवश्यक होता है कि विद्यालय में बच्चों के लिए सही व्यवस्था और सुविधाएं हो।

इसी क्रम में बच्चों की शिक्षा और स्कूल में उनको मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानने के लिए शुक्रवार को हमारा गाजियाबाद की टीम शाहपुर बम्हैटा प्राथमिक विद्यालय पहुंची। बाहर से यह स्कूल दिखने में छोटा और जर्जर है। असलियत में ये स्कूल अपनी छोटी सी कुटिया में बच्चों के लिए ढ़ेर सारा प्यार और अच्छी शिक्षा बिखेर रहा है।

इस स्कूल को बम्हैटा के पार्षद की तरफ से अत्यधिक सहायता प्राप्त होती है व सरकार के तरफ से भी स्कूल के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। इस प्राथमिक स्कूल में 1 से लेकर 5 तक की कक्षा चलती है। यहां बच्चों की पढ़ाई और उनके स्वास्थ्य का बेहतर ख्याल रखा जाता है। यहां बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी दिये जाते हैं। टीम ने इस स्कूल के टीचर के साथ बच्चों से भी उनकी कक्षा में जाकर बात की।

बच्चों का बड़ों के प्रति आदर देखकर ही उस स्कूल में बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा का अदाजा लगाया जा सकता है। इस स्कूल में न केवल बच्चों को बच्चों को पढ़ाया जाता है बल्कि उनके साफ शौचालय और अच्छे भोजन का भी ध्यान रखा जाता है। इस स्कूल के शौचालय की सफाई स्कूल के सह अध्यापक द्वारा किया जाता है। उनका कहना है कि बच्चे स्कल में केवल पढ़ने के लिये ही नहीं आते हैं बल्कि इसके लिए भी आते हैं कि स्कूल के टीचर उन्हें शिक्षा के साथ संस्कार दें।

इसी उद्धेश्य के साथ वे बच्चों को पढ़ाते हैं और सरकार द्वारा दी जाने वाली बच्चों को किताब, काॅपी, ड्रेस व अन्य सामग्री को बच्चों में वितरित करते हैं। इतना ही नहीं बच्चों की स्वास्थ्य चिकित्सा के लिये हर शुक्रवार को यहां एक एनम भी आती हैं जो बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज करती हैं। बता दें कि इस स्कल में कोई प्रधानाध्यापक नहीं है। स्कूल में पांच तक की कक्षा को पढ़ाने के लिए केवल दो ही टीचर हैं।

टीचरों की संख्या कम होने के कारण दोनों को एक साथ ही दो कक्षा के बच्चों को एक साथ पढ़ना पड़ता है। यहां के इलाके में बिजली केवल दो घंटे ही आती है जिससे बच्चों के पढ़ाई में रूकावट आती है । इस समस्या के समाधान के लिए स्कूल के दोनों टीचर ने मिलकर बच्चों की सुविधा के लिए एक इनवर्टर लिया जिससे की बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए। फिलहाल में इन दोनों अध्यापकों का कहना की इनका उद्धेश्य केवल बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार देना है अगर ये इन्हे इस स्कूल से ट्रान्सफर कर दूसरे स्कूल में भी भेज दिया जाएगा तब भी इनका उद्धेश्य केवल बच्चों को शिक्षित करना ही रहेगा।

हमारा गाज़ियाबाद की टीम इन दोनों शिक्षकों की हौसले को सलाम करती है और इनके द्वारा बच्चों की शिक्षा को लेकर किये जा रहे प्रयासों का आदर करती है।

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