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शाबाश गाज़ियाबाद: चोरी का इल्ज़ाम लगा तो छोड़ दी नौकरी, छोटी सी दुकान चलाकर जी रहे हैं ईमानदारी की जिन्दगी

शाबाश गाज़ियाबाद: चोरी का इल्ज़ाम लगा तो छोड़ दी नौकरी, छोटी सी दुकान चलाकर जी रहे हैं ईमानदारी की जिन्दगी

गाज़ियाबाद। जब बात मुश्किलों से लड़ने की आती है तो हर कोई हताश हो जाता है। इंसान के पास दो ही रास्ते होते हैं या तो वो मुश्किलों से हार मानकर बैठ जाता है या उससे लड़कर सफलता के नये आयाम खोजता है। लेकिन ये भी सच है कि ये मुश्किलें हटने के बाद एक नई सुबह की शुरुआत होती है जिसमे इन्सान खुद को दोबारा अपने कर्मों से उबारता है।

कुछ ऐसी ही परिस्तिथियों से और मुश्किलों भरे जीवन से निकलने के बाद आज अपनी खुद की चलती-फिरती दुकान चलाकर खुद्दारी का जीवन जीने वाले शिवकुमार की कहानी उन्ही के जैसे लोगों को प्रेरणा दे रही है। शिवकुमार की उम्र करीब 60 वर्ष है और इनका मकान डासना गेट के पास स्थित है। मूलरूप से फैजाबाद के रहने वाले शिवकुमार करीब 20 साल पहले गाज़ियाबाद आये थे। गरीब परिवार से होने के कारण इस शहर में ये अच्छी नौकरी की चाह में आये थे। इन्होने यहाँ आकर 1200 रूपये महीने की तनख्वाह पर नौकरी शुरू की।

यहाँ करीब 5 साल काम करने के बाद इनके मालिक ने शिवकुमार पर चोरी का झूठा इल्जाम लगा दिया। शिवकुमार बताते हैं कि ये शुरु से ही खुद्दार थे इसलिए चोरी का ये आरोप लगने के बाद नौकरी छोड़ दी। नौकरी छोड़ने के बाद ये बेरोजगार हो गए। ईमानदारी का जीवन जीने के लिए इन्होने कभी भी नौकरी न करने का फैसला ले लिया। करीब 1 साल घर बैठने के बाद चंद पैसों से इन्होने ठेले पर परचून की छोटी सी दुकान खोल ली। शिवकुमार बताते हैं कि इनके पास इतने पैसे नही थे कि ये कोई पक्की दुकान खोल सकें इसलिए यही रास्ता चुना।

पिछले करीब 17 साल से पुराना बस अड्डा से हापुड़ मोड़ जाने वाले रास्ते पर ये सड़क किनारे परचून का ठेला लगा रहे हैं। शुरुआती दिनों में शिवकुमार किराये पर ठेला लगाकर अपनी दुकान चलाते थे। धीरे-धीरे अपनी इसी दुकान से पैसे कमाकर आज खुद का ठेला खरीद लिया है। आज की तारीख में इनकी रोज की इतनी आमदनी हो जाती है कि घर का खर्च चल सके। शिवकुमार कहते हैं कि हमारा ये काम हमे सुकून देता है, भले ही छोटा है लेकिन अपना है।

शिवकुमार की ये जिन्दगी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने को कमजोर मानकर और ऐसे इल्जाम लगने के बाद खुद को दोषी समझने लगते हैं और ऐसे रास्तों पर चले जाते हैं जो समाज की नजरों में गलत होता है। हमारा गाज़ियाबाद की टीम शिवकुमार के इस खुद्दारी भरे जीवन को सलाम करती है।

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