ताज़ा खबर :
prev next

बाबापंथी.com

आज इस वेबसाइट की सख्त जरूरत है। इस वेबसाइट का काम देश में फैले हजारों बाबाओं, गुरुओं, मठाधीशों, मौलानाओं और धर्मप्रचारकों के विषय में सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करना होगा। मसलन बाबा और उसके डेरे/आश्रम का पूरा परिचय, भक्तों की अनुमानित संख्या, बाबा के गुड वर्क और राजनैतिक कनेक्शन, उसकी पर्सनल साध्वी/चेलियों का जीवन परिचय आदि-आदि।

जब देश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था के चारों स्तंभों यानि विधायिका (सांसद/विधान सभा), न्याय पालिका, कार्य पालिका (सरकार) और मीडिया, अपने-अपने कामों में बुरी तरह से फेल हो रहे हैं तभी तो आमजन का विश्वास अब भगवान और उनके एजेंटों पर बढ़ता चला जा रहा है। संसद का काम है लोक कल्याण के लिए कानून बनाना, पर वो अपने वोट बैंक को ध्यान में रखकर कानून बना रही है। सरकारों ने देश की आम जनता को इतना लूटा और ठगा है कि व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद करना भी उसकी सोच से परे है।

इसी प्रकार देश में न्यायपालिका निचले स्तर पर अपना विश्वास खो चुकी है। लोगों को फैसले तो मिलते हैं, पर इंसाफ बहुत कम मिल पाता है। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय आम आदमी की पहुँच के बाहर हैं और रही सही कसर न्याय मिलने में लगने वाले समय ने पूरी कर दी है। अपराधियों के हौसले केवल इसलिए बुलंद रहते हैं कि बीस-तीस साल तक केस चलते रहना यहाँ आम बात है।

मीडिया पर भी अब भरोसा नहीं किया जा सकता है। हर मीडिया हाउस के अपने-अपने आका हैं और अपनी-अपनी पसंद। मीडिया हाउस, सच से ज्यादा भ्रम फ़ैलाने में लगे हैं। सोशल मीडिया नामक उस्तरा अब हर बंदर लिए बैठा है। जिस कारण सच जान पाना और किसी भी खबर पर विश्वास कर पाना लगभग असंभव हो गया है। मीडिया बड़े से बड़े अपराधी को बेगुनाह साबित कर देता है और निर्दोष को अपनी ट्रायल में गुनहगार बना के रख देता है।

बाबाओं को भक्तों और अंधभक्तों की भीड़ दिलाने में सामाजिक असमानता और जातिगत ऊँच-नीच ने भी बहुत बड़ा योगदान दिया है। हर आदमी अपनी-अपनी गिरेबान में झांके तो पता चल जायेगा की बाबाओं और मौलवियों को भक्तों और चेलों का चारा खिलाने में हम सब बराबर के हिस्सेदार हैं।

तो इस लिए बाबापंथी.com वेबसाइट बनाकर यूथ और टेक्नोलॉजी की मदद से बाबापंथी को राह पर लायेंगे। अच्छे और सच्चे बाबा, गुरु, सन्यासी या साधु किसी प्रचार अथवा भक्तों के मोहताज़ नहीं होते हैं। इसलिए इस वेबसाइट पर केवल चमत्कारी, आडम्बरी, फर्जी, व्यवसायी, अय्याश और बड़ी संख्या में भक्त होने का दावा करने वाले बाबा या गुरु ही होंगे। इस वेबसाइट के द्वारा बाबाओं को एक्स्पोज़ करना आसान होगा।

याद रहे यूथ और तकनीक इन दोनों पर ही मानवता का भविष्य निर्भर करता है। इसलिए अपने बच्चों के सोचने और समझने की ताकत से उन अंध भक्तों के जीवन में रोशनी की किरण लानी होगी। ऐसा होगा और जल्द होगा।

इसी उम्मीद के साथ
आपका अपना
अनिल कुमार

By अनिल कुमार (पब्लिशर व एडिटर-इन-चीफ) : Saturday 18 नवंबर, 2017 17:16 PM