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री- अलॉटमेंट की जांच में गायब मिले जीडीए के 139 में से 11 प्लाट

री- अलॉटमेंट की जांच में गायब मिले जीडीए  के 139 में से 11 प्लाट

गाज़ियाबाद। जीडीए में हुए 139 प्लॉटों के घोटाले में नया खुलासा सामने आया है। जिसमें यह पता चला है कि 139 में से 11 प्लॉट है ही नहीं इस मामले में जीडीए वीसी कंचन वर्मा की ओर से पूरी रिपोर्ट प्रमुख सचिव आवास को दे दी गई है। अब 31 अगस्त को प्रमुख सचिव आवास मुकुल सिंघल और जीडीए कंचन वर्मा को हाईकोर्ट में पेश होकर जवाब दाखिल करना है।

कुल मिलाकर 2005- 7 के बीच 139 प्लॉटों का भी अलॉटमेंट किया गया है। अर्बन डेवलपमेंट एक्ट के मुताबिक, री- अलॉटमेंट कंडीशनल होता है, इसमें प्लाट की लोकेशन और केटेगरी चेंज नहीं हो सकती। इस सबकी अनदेखी करते हुए यह घोटाला किया गया। जीडीए में की गई जांच के दौरान पता चला कि री- अलॉटमेंट होने के बाद 15 दिन के अंदर प्लॉटों की रजिस्ट्री करा ली गई और बाद में 15 दिन के अंदर ही डबल रजिस्ट्री हो गई।

इसका साफ मतलब है कि पहले प्लाट बहाली कर मूल आवंटी के पक्ष में रजिस्ट्री कराई गई और इसके बाद मूल आवंटी से रजिस्ट्री कर इसको बेच दिया गया। जानकारों का मानना है कि इस गोरखधंधे में री- अलॉटमेंट के दौरान पैसा जमा मूल आवंटी द्वारा नहीं कराया गया। यह पैसा दूसरी रजिस्ट्री कराने वाले व्यक्ति के जरिये कराया गया। सबसे चौकने वाला बात चेकिंग के दौरान यह मिला कि 139 में से 11 प्लाट मौके पर नहीं मिले। वैसे इस मामले की पूरी रिपोर्ट जीडीए वीसी कंचन वर्मा की ओर से प्रमुख सचिव आवास मुकुल सिंघल को सौप दी गई है।

31 अगस्त को प्रमुख सचिव आवास को यह भी जवाब देना है कि जीडीए का सेक्टर रेट मार्केट रेट नहीं हो सकता। दरअसल इस मामले में जीडीए ने अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया था कि प्लाट का सेक्टर रेट बाजारू रेट होता है। हालांकि जीडीए के इस तर्क को कोर्ट में प्रमुख सचिव आवास ने ख़ारिज कर दिया है, लेकिन इसके लिए अब लिखित में कोर्ट में हलफनामा दिया जाएगा।

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By सत्याभा : Tuesday 26 सितंबर, 2017 05:38 AM