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रेडियो द्वारा देश के बदलाव की कड़ी बनना चाहती हैं वर्षा छबारिआ

रेडियो द्वारा देश के बदलाव की कड़ी बनना चाहती हैं वर्षा छबारिआ

नई दिल्ली। रेडियो सुनना कुछ लोगों के लिए एक अनुभव एक जूनून होता है और यह अनुभव हर बार नया होता जाता है यह जूनून हर बार बढ़ता ही जाता है। साल 2003 से अपने रेडियो के जूनून की शुरुआत कोलकाता शहर के आल इंडिया रेडियो के आकाशवाणी से करने वाली वर्षा छबारिआ बताती हैं की वह भी एक समय था जब रेडियो सीखाने वाले बस चंद ही लोग हुआ करते थे अमीन सायानी जी की आवाज़ ही उनके लिए सबकुछ थी। जिसे सुन कर वह अपना रेडियो का गुरु ईश्वर की कल्पना कर लेती थी। उस दौर में आकाशवाणी के ऑडिशन पास करना जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।

वर्षा कहती हैं, मुझे आज भी याद है मेरे जीवन का पहला रेडियो कार्यक्रम आकाशवाणी कोलकाता के संध्या कार्यक्रम छाया लोक में महिला सशक्तिकरण पर ही था। उसके बाद हर कार्यक्रम में वर्षा ने जाना की अच्छा बोलने के लिए अच्छा पढ़ना और अच्छा सोचना बहुत ही ज़रूरी है। एक समय था जब केवल मधुर आवाज़ों को ही रेडियो के लिए उपयुक्त माना जाता था मगर प्राइवेट एफएम के आने से इस धरना में नयापन आ गया। अब रेडियो में मधुर काम चतुर चपल और चंचल आवाज़ का मिश्रण ही एक अच्छा रेडियो जॉकी के गुण माने जाते हैं। वर्षा ने कोलकाता जन्म स्थान से मुंबई आकर इंटरनेट रेडियो और डबिंग कार्टून इंडस्ट्री में कई वर्ष तक काम किया।

फिर अचानक एक दिन किसी प्रोडक्शन हेड ने वर्षा को रिकॉर्ड करते सुना और वहीं उन्हें एक नामी कमर्शियल एफएम में काम करने का प्रस्ताव दे दिया। रेडियो के जूनून को साथ लेकर जीने वाली वर्षा कहां ना कहने वाली थी, और वह निकल पड़ी मध्य प्रदेश अपने रेडियो अभियान में। वर्षा को वहां की भाषा व के लोगों का रहन सहन जानना था तो वह हर शाम को निकल पड़ती थी वहां की सड़कों पर वहां के लोगों से बात करने यहाँ तक की रिक्शा चालक से शहर के बारे में जानने की कोशिश करती यह सब कुछ वर्षा के कार्यक्रमों के लिए मदद करता था।

सफल रेडियो जॉकी या प्रोड्यूसर में सीखने की और लगातार नया करने की ललक कभी ख़त्म नहीं होनी चाहिए कमर्शियल एफएम में जम कर कई वर्षों तक उच्च पदों पर काम करने के बाद वर्षा के जीवन में फिर एक रोचक मोड़ आया। वर्षा के रेडियो अभियान में इस बार मौका सामुदायिक रेडियो का था ना कहना तो वर्षा के शब्द कोष में कभी था ही नहीं और शायद यह इनके रेडियो अभियान का सबसे रोचक और जीवन से जुड़ा अनुभव रहा। सामुदायिक रेडियो अपने आप में जीवन जीना है।

वर्षा अपने जीवन में रेडियो के द्वारा भारत देश की एक बदलाव की कड़ी बनना चाहतीहैं ताकि आने वाले समय में रेडियो को प्यार से ज्यादा पूजा जाय रेडियो जैसा मित्र नहीं होता एक छोटे से रेडियो सेट के पीछे एक ऐसी दुनिया जहाँ आवाज़ें आपके जीवन से जुड़ जाती हैं आपके साथ हस्ती हैं गुनगुनाती है दुनिया की शायद एक मात्र ऐसी वस्तु है जो दिखती नहीं मगर बिकती ज़रूर है।

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By सत्याभा : Monday 19 फ़रवरी, 2018 09:02 AM