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महिलायें को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत हैं डीएम मिनिस्ती एस

महिलायें को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत हैं डीएम मिनिस्ती एस

गाजियाबाद। जिला प्रशासन गाजियाबाद प्रदेश सरकार की सबका साथ सबका विकास के मूल मंत्र के उद्देश्य को साकार करने के लिए प्रयासरत है। समाज के अन्तिम छोर पर खड़े वर्ग को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक अनूठी पहल शुरू की गई है।

इसके जिसके तहत सरकारी अस्पतालों में भोजन आपूर्ति तथा बेसिक स्कूलों में छात्र-छात्राओं को निःशुल्क यूनिफॉर्म जैसी योजनाओं की ज़िम्मेदारी समाज के कमजोर वर्ग को देकर उन्हें रोजगार दिया जा रहा है। साथ ही उन्हें स्वावलम्बी एवं आत्मनिर्भर बनाने की प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत महिला “स्वयं सहायता समूहों” की महिलाओं को आगे लाया जा रहा है। समूह की इन महिलाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर उन्हे स्वरोजगार देने की अनूठी पहल जिला प्रशासन द्वारा की गई है।

गाजियाबाद के जिला चिकित्सालय एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो प्रसव हेतु भर्ती महिलाओं के भोजन व नास्ते की आपूर्ति का काम “स्वयं सहायता समूहों” की महिलाओं को दे दिया गया है। इन समूहों को अस्पतालों में भर्ती प्रति महिला 100 रू0 भोजन एवं नास्ते के लिए दिया जा रहा है। जिससे समूहों की महिलायें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

इस के साथ ही अब प्रत्येक सरकारी अस्पतालों में महिला समूहो के माध्यम से एक स्थाई कैन्टीन की खोलने की व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान मे जिले के 3 जिला चिकित्सालयों तथा 4 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में “महिला स्वयं सहायता समूहों” के माध्यम से भोजन व नास्ते की आपूर्ति की जा रही है। जिसका भुगतान समूहों को नियमित रूप से किया जा रहा है।

इसके अलावा कलेक्ट्रेट परिसर में भी एक कैन्टीन “महिला स्वयं सहायता समूह” द्वारा खोली गई है। जिसके माध्यम से कलैक्ट्रट व विकास भवन में आने वाले लोगों को तथा कलेक्ट्रेट व विकास भवन की सरकारी बैठकों में चाय, नास्ता व भोजन की आपूर्ति की जा रही हैं। पिछले महीने कलेक्ट्रेट की कैन्टीन का निरीक्षण कर मण्डलायुक्त डॉ प्रभात कुमार ने भी प्रशासन के इस प्रयास की सराहना की थी।

इसके साथ ही महिला समूहों को बेसिक विद्यालयों में बच्चों की यूनीफॉर्म सिलाई का काम भी दिया गया है। जिसमें समूहों को कपड़े की आपूर्ति विद्यालयों के माध्यम से की जा रही है। इसके लिए समूहों को प्रति यूनीफार्म 70 रूपये सिलाई का भुगतान किया जाता है। जिले में 8500 स्कूली बच्चों की यूनीफार्म सिलाई का काम स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से कराया जा रहा है।

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