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महिलाओं के खुद को मजबूत करने पर होगा महिला सशक्तिकरण- मनीषा सिंह, सीओ सिटी(प्रथम) गाज़ियाबाद

महिलाओं के खुद को मजबूत करने पर होगा महिला सशक्तिकरण- मनीषा सिंह, सीओ सिटी(प्रथम) गाज़ियाबाद

गाज़ियाबाद। समाज में आजकल महिला सशक्तिकरण नाम का शब्द चर्चा में है। जिसको भी देखो चाहे महिला हो या पुरुष, हर कोई महिला सशक्तिकरण का राग अलाप रहा है। लेकिन असली सशक्तिकरण केवल चर्चा से नहीं बल्कि उसके लिए समाज में आगे आकर कुछ काम करने से होता है। जब समाज के लिए कुछ करने का जज्बा हो, तो कोई भी समस्या सफ़लता में रोड़ा नहीं बनती है। नारी सशक्तिकरण का जीता-जागता उदाहरण हैं गाज़ियाबाद नगर की सीओ(प्रथम) मनीषा सिंह।

मूलरूप से यूपी के फ़तेहपुर की रहने वाली मनीषा सिंह ने 2001 में यूपी पुलिस सेवा में प्रवेश किया और वर्तमान में वें गज़ियाबाद में अपनी सेवाएँ दे रही हैं। हालाँकि ये इतना आसान नहीं था लेकिन, अपनी मेहनत और लगन के दम पर मनीषा सिंह ने सफ़लता हासिल की।

मनीषा सिंह के पिता बैंक में मैनेजर थे। दो बहन और एक भाई के बीच पली बढ़ी मनीषा सिंह का सपना बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का था। इलाहाबाद विवि से एमएससी की पढ़ाई करने के बाद मनीषा सिंह ने तय कर लिया था कि, उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाना है।

इस के लिए उन्होंने इसकी कोचिंग और ट्रेनिंग के लिए एक एकेडमी जॉइन कर लिया। इसी दौरान मनीषा की शादी हो गई। कोचिंग के दौरान ही मनीषा सिंह एक बच्चे की माँ भी बन गई। जाहिर सी बात है कि अब मनीषा सिंह के ऊपर ज़िम्मेदारियाँ बढ़ गई थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

वे बेटे की परिवरिश के साथ अपनी कोचिंग भी करती रही। इसके बाद यूपी पुलिस सेवा में उनका चयन हो गया। हालाँकि किसी माँ के लिए यह आसान नहीं होता है कि वह अपने दुधमुंहे बच्चे को अकेला छोड़कर ट्रेनिंग करे। लेकिन अपने लक्ष्य पर अटल मनीषा सिंह ने अपने आप को मानसिक रूप से मजबूत बनाया और अकेले रहकर ट्रेनिंग की। इस दौरान उनके ससुराल वालों ने कदम-कदम पर उनका साथ दिया। और ढ़ेरों कठिन परिस्थितयों के बावजूद भी आखिर उन्होंने अपने लक्ष्य को पा ही लिया।

महिलाओं के लिए पुलिस सेवा में व्याप्त भ्रांतियों के बारे में वे बताती हैं कि, शुरुआत में विभाग के लोग किसी भी मामले में उनकी भूमिका को लेकर सशंकित रहते थे। लेकिन बदलते समय के साथ उनके काम को देखकर अब कोई यह नहीं सोंचता कि यह मामला उनके वश से बाहर है।

लड़कियों को वे सन्देश देना चाहती हैं कि, अपने लक्ष्य का निर्धारण करो और उससे जरा भी पीछे न हटो। बार-बार आपके काम को लेकर ताने सुनाते लोग मिल जायेंगे लेकिन एक बार आपने अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया तो फिर वही लोग आपके गुण भी गायेंगे।

महिला सशक्तिकरण का जुमला मारने से अब काम नहीं चलने वाला है। उसके लिए आपको समाज के साथ कंधे से कंधा मिलकर चलना पड़ेगा। महिलायें जब तक पाने अपने साहस और शक्ति के साथ खुद सामने आकर अपनी समस्याओं से नहीं लगेंगी तब तक महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य पूरा नहीं होगा।

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