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शाबाश गाज़ियाबाद: कर्ज में डूबकर भी नही टूटी हिम्मत, चूड़ियाँ बेचकर जी रही हैं खुशहाल जिन्दगी

शाबाश गाज़ियाबाद: कर्ज में डूबकर भी नही टूटी हिम्मत, चूड़ियाँ बेचकर जी रही हैं खुशहाल जिन्दगी

गाज़ियाबाद। हम अक्सर छोटी सी नाकामी मिलने पर हताश हो जाते हैं। लाख कोशिशें करते हैं लेकिन फिर भी अपने काम में असफल हो जाते जाते हैं। लेकिन आपकी असफलता सिर्फ यह सिद्ध करती है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नही हुआ। जिन्दगी में कुछ करने के लिए बस आत्म विश्वास और जज्बे की जरूरत होती है फिर आप कोई काम करना चाहो, उसे करने से दुनिया की कोई ताक़त आपको नही रोक सकती।

आज हम आपसे ऐसी महिला की कहानी साझा करने जा रहे हैं जिसके बारे में पढ़कर आप बहुत कुछ सोचने पर मजबूर हो जायेंगे। पुराने बस अड्डा के पास बने फ्लाई ओवर के नीचे फुटपाथ पर चूड़ियाँ बेचती 60 वर्षीय शांति देवी की कहानी सच में कुछ अलग है। समाज की ओछी सोच और तानों को नजर अंदाज करके ईमानदारी का जीवन जीने वाली शांति देवी अपने जीवन के उन उतार-चढ़ाव से गुजरी हैं जहां आकर हर इन्सान अपनी उम्मीदें खो बैठता है।

शांति देवी का अपना एक परिवार है, इनके चार बच्चे हैं जिसमे तीन बेटों की शादी कर चुकी हैं और एक बेटी भी अपने ससुराल में सुखी जीवन बिता रही है। शांति देवी बताती हैं कि कुछ साल पहले लोगों कहने पर इनके पति ने परिवार चलाने के लिए गाड़ियों का कारोबार शुरु किया था। इनका कारोबार अच्छे तरीके से चलने भी लगा था लेकिन इनकी तकदीर को कुछ और ही मंजूर था। कारोबार शुरु करने के कुछ ही हफ़्तों बाद इनके घर में चोरों ने डकैती डाल दी। चोर इनकी कई गाड़ियाँ उठा ले गए। इस हादसे के बाद शांति देवी के पति को इस कारोबार में घाटा लगने लगा और बहुत सारा कर्जा भी हो गया। कर्जदार इनके दरवाजे पर आने लगे और अपने पैसों की मांग करने लगे।

धीरे-धीरे इनका परिवार अर्श से फर्श पर आ गया और इनके पति इसी सदमे में बीमार हो गए। बीमार पति और घर के हालात शांति देवी से देखे नही जा रहे थे। प्यार से भरा इनका परिवार पूरी तरह बिखर चुका था। अपनी शादी के बाद शांति देवी कभी घर से बाहर भी नही निकली थीं। इतना सब होने के बाद घर का खर्च चलाना जरूरी हो गया था। इसलिए उन्होंने दूसरों के घरों में बर्तन मांजने के लिए अपने पति से आज्ञा मांगी, लेकिन इनके पति खुद्दार थे इसलिए उन्होंने इस काम के लिए साफ़ मना कर दिया।

इसके बाद पति की ही सलाह पर शांति देवी ने पति के ही एक दोस्त के घर महिलाओं को चूड़ी पहनाने का काम सीखा और धीरे-धीरे इस काम में माहिर हो गईं। ये काम करने के बाद धीरे-धीरे इनकी जिन्दगी पटरी पर आने लगी। इसी छोटे से काम से और परिवार वालों की मदद से अपने सभी बच्चों की शादी की और उन्हें इस काबिल बनाया कि उन्हें किसी के हाथ न फैलाना पड़े। वर्तमान के समय में इनके तीनो बेटे काबिल हैं और अपने पैरों खड़े हैं।

इनके बेटे और परिवार वाले शांति देवी के चूड़ी बेचने के इस काम से अक्सर नाराज रहते हैं लेकिन इनका कहना है कि इसी काम ने मुझे जीने की नयी उम्मीद दी है इसलिए इसे बंद नही कर सकते। शांतिदेवी और उनके पति को समाज की ओछी मानसिकता से कोई मतलब नही है। सरकारी योजनाओं से भी ये कोई मतलब नही रखना चाहते क्यूंकि कचहरी के बार-बार चक्कर काटने की इनकी हिम्मत नही। पिछले कई सालों से शांतिदेवी यहीं बैठकर खुद का खर्च चलाने के लिए चूड़ियाँ बेचने का काम करती हैं। अपने काम को करने में इन्हें कोई शर्म नही क्यूंकि ये इनका खुद का काम है किसी की गुलामी नही।

शांति देवी की ये कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो हिम्मत हार जाने पर खुद का ही जीवन समाप्त कर लेते हैं और अपने पीछे कायरता की निशानी छोड़ जाते हैं। इनकी कहानी उन माँ-बाप को भी प्रेरणा देती है जो जिन्दगी के इस पड़ाव पर आकर अपने पाल्यों के सहारे जिन्दगी गुजरना चाहते हैं। हमारा गाज़ियाबाद की टीम शांति देवी के इस साहसी जीवन को सलाम करती है और आपसे भी अपील करती है यदि आपके शहर, गाँव और मोहल्ले में ऐसे लोग हों तो उनकी कहानी हमें hamaraghaziabad100@gmail.com पर भेज दें।

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