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शाबाश इंडिया: मिलिये एक ऐसे भाई से जिसने अपने बलबूते संवार दी बहनों की जिंदगी

शाबाश इंडिया: मिलिये एक ऐसे भाई से जिसने अपने बलबूते संवार दी बहनों की जिंदगी

झारखण्ड | कहा जाता है कि भाई बहन का रिश्ता पवित्र होता है जिसे काई नहीं तोड़ सकता । आज के समय में जहां एक तरफ लड़कियों को बोझ समझा जाता है वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा परिवार है जहां अपनी बहन को शिक्षित बनाने के लिए एक भाई ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी।

जमशेदपुर के बिरसानगर में रहने वाले श्याम शर्मा एक बढ़ई हैं और लकड़ी का काम करके अपने परिवार के साथ हंसी-खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इनकी पांच बेटी और एक बेटा है। जिनमें से एक बड़ी बेटी की शादी हो गई है। इनका बेटा मिथुन शर्मा जो वर्तमान में ‘कनिक्सा कंपनी’ के एमआर हैं। इन्होंने ग्रेजुऐशन कर रखा है जबकि इनकी एक बहन मास काॅम कर पत्रकारिता नाम रौशन कर रही है और तीन बहनें एमए, ग्यारहवीं और नौवीं  में हैं।

बता दें कि हमारा गाज़ियाबाद की टीम ने जब मिथुन शर्मा से अपनी पढ़ाई छोड़कर बहनों को पढ़ाने का कारण पूछा तो इन्होंने बताया कि हम लड़के हैं जो किसी तरह कमा कर अपना जीवन जी लेते हैं लेकिन लड़कियों का जीवन मायके की चार दीवारी से ससुराल की चौखट पर खत्म हो जाता है। उनसे कोई ये नहीं पूछता की वो अपने जीवन में क्या करना चाहती हैं।

आगे उन्होंने बताया कि ‘‘वर्तमान समय में लड़कियों से साथ जो घटनाएं हो रही हैं ऐसे में लड़कियों का शिक्षित होना आवश्यक है। मै नहीं चाहता कि मेरी किसी भी बहन को भविष्य  में काई भी परेशानी आए, इसलिए उन्हें पढ़ा-लिखा कर अपने बलबूते पर खड़ा होना सिखा रहा हूं’’। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण इन्होने आठवीं कक्षा से ही काम करना शुरू कर दिया | शुरू में वे सुबह अख़बार बेचा करते थे | लगभग एक महीने बाद उन्होंने उस काम को छोड़ मेडिकल में काम करना शुरू कर किया | धीरे-धीरे ही सही पर काम के साथ इन्होंने अपनी पढाई जारी रखी | किसी तरह उन्होंने ग्रेजुएशन किया और आज कनिक्सा कंम्पनी के एमआर हैं |

इनके पिता श्याम शर्मा से बात करने पर ये पता चला कि इनके पिता नें इनकी शादी तभी करा दी जब ये इंटर कर रहे थे। इन्होंने भी ग्रेजुएशन कर रखा है और इनकी नौकरी पुलिस में होने वाली थी। लेकिन पत्नी के बहुत ज्यादा तबियत खराब होने के कारण इन्हें नौकरी छोड़कर वापस घर आना पड़ा।

आगे इन्होंने बताया कि इनके परिवार वालों ने इनका साथ छोड़ दिया था। तबसे वे अपने परिवार के साथ अलग रहने लगे । गरीबी की धूप में लगभग 12 सालों तक इनका परिवार जलता रहा, लेकिन इन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इनका कहना है उस कठिन  घड़ी में इनकी पत्नी सुनैना ने इनका पूरा साथ दिया और आज ये अपने परिवार के साथ खुशी से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

श्याम शर्मा और उनके बेटे मिथुन का कहना है कि लड़की  के घरवाले ही अगर अपनी बेटी को बोझ समझेंगे और उन्हें जन्म लेने से पहले ही मार डालेंगे तो लड़कों को जन्म कौन देगा ? लड़कियां न केवल मां, बहन, बेटी या बहू होती हैं बल्कि एक जननी होती है जो मनुष्य की अस्तित्व को बचाने का कार्य करती है। ऐसे में लड़कियों बोझ नहीं समझना चाहिये बल्की उन्हें सम्मान देना चाहिये।

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By प्रगति शर्मा : Tuesday 23 जनवरी, 2018 19:17 PM