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यदि बच्चें हैं योन शोषण के शिकार, तो जानिए क्या हैं उनके अधिकार

यदि बच्चें हैं योन शोषण के शिकार, तो जानिए क्या हैं उनके अधिकार

गाज़ियाबाद | हमारे देश की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि इस देश के कई नागरिकों को सरकार और कानून द्वारा प्राप्त अधिकारों की जानकारी नहीं है जिसके कारण वे कई प्रकार के शोषण का शिकार होते हैं। शोषण से संबंधित एक ऐसी ही गहन समस्या आज हमारे देश के नौनिहालों और लड़कियों के मौत का कारण बन रही है। वो है योन शोषण की समस्या। ये एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में कहने से बच्चे झिझकते हैं और शोषण का शिकार होते चले जाते हैं।

कहा जाता हैं कि बचपन में बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, उन्हें जिस रूप में ढ़ालना चाहे हम ढ़ाल सकते हैं। बच्चों को अच्छे संस्कार देने के लिए हम उसकी संगती, उसके दोस्तों का भी ख्याल रखते हैं, लेकिन हम ये भूल जाते है कि इन सब के अलावा हमें उन्हें एक और गंदगी से दूर रखना चाहिये, योन शोषण का शिकार होने से।

आज कई बच्चे और बच्चियां, ऐसे हैं जो अपना जीवन डर और खौ़फ के साए में व्यतीत कर रहे हैं। न तो वे बाहर सुरक्षित रह पाते हैं और ना ही घर में। ऐसे में वो बस एक जिंदा लाश बनकर रह जाते हैं। जो बच्चे स्कूल या ट्यूशन जाते हैं, वहां के टीचर या मास्टर द्वारा ही ये बच्चे शोषण का शिकार होते हैं और जो घर पर रहते हैं वे घर के नौकर, रिश्तेदार, चाचा यहां तक के पिता के द्वारा शोषित किये जाते हैं।

कई राज्यों, शहरों में इस तरह की घटनाएं सामने आई है कि स्कूल से लौटते वक्त या खेलते हुए किसी बच्ची को बहला-फुसलाकर घर के पड़ोसी द्वारा ही यौन शोषण किया जाता है । इनमें से कई बच्चे ऐसे होते हैं जो घटना के बाद अपने माता-पिता को इसकी जानकारी दे देते हैं लेकिन कुछ बच्चे अपने अभिभावकों से इस बात को छुपा लेते हैं, ये सोचकर की उसके माता-पिता को बताने के बाद पता नहीं क्या होगा।

इस तरह के घिनौने कामों में न केवल टीचर, मास्टर, पड़ोसी, नौकर या रिश्तेदार  संलिप्त  पाए गए हैं  बल्कि बच्चों के माता-पिता स्वयं इस घटना को अंजाम देते हैं। ऐसे में ये बच्चे या तो डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं या हर दिन इसी तरह उनका यौन शोषण होता रहता है। हमारे देश में हर तरह के अपराधों के लिए कानून बनाए गए हैं लेकिन कानूून और अपने अधिकारों की जानकारी ना होने के कारण वे इस समस्या से अपने आप को मुक्त करने में असफल होते हैं।

इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यकता है अपने अधिकारों को जानने की और बिना झिझक के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की।  इन अपराधों से बच्चों को मुक्ति दिलाने के लिए 2012 में  यौन अपराध कानून से बच्चों का संरक्षण ( Protection of Children from Sexual Offences Act) अधिनियम  बनाया गया था | जिससे की बाल शोषण से बच्चों को मुक्ति दिलाई जा सके |

लेकिन इस अधिनियम के नियमों की जानकारी लोगों को पता न होने के कारण शोषित परिवार रिपोर्ट दर्ज करवाकर पुलिस अधिकारियों द्वारा इसकी कार्यवाही की प्रतीक्षा किया करते थे | लेकिन अब प्रमुख निम्नलिखित नियमों के माध्यम से लोग पुलिस अधिकारियों से उचित कार्यवाई की मांग कर सकते है | लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पीओसीएसओ)  के अनुसार अनुच्छेद 4(2) के अंतर्गत कुछ नियम बताए गए हैं जिसे थाने स्तर पर किया जा सकता है, जो  निम्लिखित हैं:-

  • धारा 21(1) के अनुसार ‘‘यदि काई व्यक्ति अपराधों की रिपोर्ट / रिकार्ड करने में विफल रहेगा तो उसे 6 मास तक की सजा का या जुर्माना या फिर दोनो से दंडित किया जाएगा’’।
  • धारा 19(2) के अनुसार ‘‘प्रत्येक मामला रोजनामचा में अंकित जाएगा’’।
  • धारा 19(6) के अनुसार ‘‘ बच्चों के प्रति सभी लैंगिक अपराधों की प्रथम सूचना किशोर पुलिस ईकाई अथवा स्थानीय पुलिस द्वारा सम्बन्धित धाराओं के अंतर्गत की जाएगी।
  • धारा 19(2) के अनुसार ‘‘रिपोर्ट सूचना देने वाले को पढ़कर सुनाई जाएगी’’।
  • बाल संरक्षण अधिनियम 4(7) के अनुसार किशोर पुलिस इकाई अथवा स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज किये गए रिपोर्ट की सूचना जनपद की बाल कल्याण समिति को 24 घंटे के अंदर देना होगा।
  • धारा 19(3) के अनुसार ‘‘यदि शिकायतकर्ता बच्चा है तो रिपोर्ट उसी भाषा में दर्ज किया जाएगा, जिस भाषा में बच्चे ने कहा है, ताकी बच्चे को सब समझ में आ जाए। साथ ही रिकार्ड की गई रिपोर्ट को सूचना देने वाले बच्चे को पढ़कर सुनाई जाएगी’’।
  • पाक्सो (पीओसीएसओ) अधिनियम 4(2) के अनुसार ‘‘जितनी जल्दी हो सके एफ. आई. आर. लिखी जाएगी’’।
  • पाक्सो नियम 4(1) के अनुसार ‘‘बाल लैंगिक शोषण की शिकायत या सूचना प्राप्त होने के तुरन्त बाद, जांच अधिकारी, शिकायतकर्ता को अपना नाम, पद, पता और फोन नम्बर देगा।
  • पाक्सो नियम 4(2) (अ) के अनुसार रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति को एफ. आई. आर. की प्रतिलिपी निःशुल्क दी जाएगी।
  • धारा27(1) के अनुसार बच्चे का चिकित्सीय परीक्षण, दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 164(1) के अनुसार किया जाएगा।
  • धारा 27(3) के अनुसार पुलिस अधिकारी चिकित्सीय परीक्षण के लिए स्वैच्छिक संगठनों, एनजीओ के कार्यकर्ता से सहयोग प्राप्त करेंगे।

इस अधिनियम न केवल बाल शोषण को ख़त्म किया जा सकता है बल्कि इसके माध्यम से लैंगिक अपराधों  से देश को मुक्ति दिलाई जा सकती है | उपयुक्त नियमों के माध्यम से कोई भी पीड़ित बच्चा या मुखबिर अपनी रिपोर्ट पुलिस को दे सकता है और उचित कार्यवाई की मांग कर सकता है |

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