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शाबाश इंडिया : जब उठ गया प्रशासन से भरोसा तो…खुद ही करा दिया स्कूल का सुधार

शाबाश इंडिया : जब उठ गया प्रशासन से भरोसा तो…खुद ही करा दिया स्कूल का सुधार

गाज़ियाबाद। शिक्षा का स्थान हमारे जीवन में सबसे ऊपर है। सामाजिक परिवर्तनों में इसी के बलबूते एक बड़ी लड़ाई लड़ी गई है और समाज की दशा-दिशा बदलने में सफ़लता मिली है।

व्यवस्थाओं में खामियों के चलते जब सरकारी योजनायें परवान नहीं चढ़ पाती हैं तो शिक्षा के इन मंदिरों को सुधारने के लिए हमारे समाज के ही कुछ लोग निकल कर आते हैं। और जो काम सरकारें ढेर सारी योजनायें बना कर नहीं कर पाती हैं, वो काम ये लोग बिना किसी सरकारी मदद के कुछ ही दिन में करवा देते हैं।

हम आपकी मुलाकात करवाते हैं कैला भट्टा इस्लाम नगर निवासी एडवोकेट मोहसिन अहमद से, जिन्होंने न केवल शिक्षा के मंदिर को सुधारने में सहयोग किया बल्कि उसमे पढ़ने वाले बच्चों को कॉपी, पेन और बैग भी उपलब्ध करवा रहे हैं।

सरकारी सिस्टम की मार से लाचार कैला भट्टा के प्राइमरी स्कूल और लड़कियों के लिए बने स्कूल की हालत बेहद खराब हो चुकी थी। करीब 700 के आस पास की छात्र संख्या वाले इस स्कूल को नया जीवन देने के लिए न तो प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम उठाये जा रहे थे और न ही आस पास के स्थानीय लोग इस को संवारने के लिए कोई सहयोग दे रहे थे। इस पर मोहसिन के एनजीओ ग्लोब सामाजिक समिति ने कुछ ठोस कदम उठाने की सोंची। ये लोग प्रशासन से इस स्कूल को सुधारने के लिए गुहार लगाई लेकिन सरकारी सिस्टम के आलसी स्वभाव की वजह से इनका भरोसा उस पर से उठ गया फिर इन लोगों ने सरकारी मदद लिए बिना ही स्कूल को सुधारने का काम शुरू कर दिया लेकिन इनकी राह में आसपास के ही लोगों ने रोड़े अटकाने शुरू कर दिए।

दरअसल आसपास के लोगों ने स्कूल को बारातघर में बदल दिया था, शादी के मौसम में आए दिन स्कूल की पढ़ाई पूरी तरह से अव्यवस्थित रहती थी। इन लोगों ने इस बात का पुरजोर तरीके से विरोध किया और अंततः वहां से बारातघर को हटवाना पड़ा। इसके बाद इन लोगों ने स्कूल की व्यवस्थाओं पर ध्यान देना शुरू किया। जिसमें इन्होने स्कूल के पास ही नगर निगम द्वारा डाले जा रहे कूड़ाघर को हटवाया।

एनजीओ के लोगों ने मिलकर स्कूल का सौन्दर्यीकरण करवाया जिसमे स्कूल की दीवारें सही करवाई गई। स्कूल का पूरी तरह से रंग रोगन किया गया। स्कूल में कंप्यूटर लगवाए गए। स्कूल में ब्लैकबोर्ड की जगह पर व्हाईटबोर्ड लगवाये गए। स्कूल के बच्चे पहले टाट पट्टी पर बैठते थे इस पर स्कूल में कुर्सी टेबल लगवाई गई। यह सारे काम एनजीओ के अपने पैसे से करवाए गए। करीब आठ से दस साल की मेहनत के बाद आज स्कूल का वातावरण पूरी तरह से बदल चुका है।

अब स्कूल में सारे बच्चे यूनिफ़ॉर्म में आते हैं। वार्षिक परीक्षा में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया जाता है। स्कूल में ठीक से पढ़ाई हो रही है। एनजीओ के अध्यक्ष हाजी इस्लाम और मोहसिन अहमद बताते हैं कि, अगर समाज के अन्य तबकों से भी इस तरह से लोग निकल कर आ जायें और स्कूलों को सुधारने में अपना योगदान दें तो जल्द ही शहर के उपेक्षित पड़े स्कूलों को सुधार कर वहां पर अच्छी शिक्षा दी जा सकती है।

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