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वोटर बजाए बीन तो नाचे नेता,

वोटर बजाए बीन तो नाचे नेता,

मित्रों अभी कुछ ही दिन पहले की बात है जब हम उत्तर प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था, महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों, भू माफिया और अतिक्रमण के खिलाफ तत्कालीन समाजवादी सरकार के खिलाफ लामबंद हो कर खड़े थे। उस सरकार के खिलाफ हमारा गुस्सा इतना ज्यादा था कि हमने उसे सत्ता से बेदखल कर एक नई सरकार बना डाली। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी नई सरकार ने धीरे-धीरे ही सही मगर सत्ता पर अपनी पकड़ दिखानी शुरू कर दी है। हमारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश योगी की प्राथमिकताओं वाले क्षेत्रों में था सो उन्होंने यहाँ अधिकारियों की तैनाती के समय विशेष सावधानी बरती।

मेरठ मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार से लेकर हाल ही में नगरायुक्त का पदभार सँभालने वाले चंद्रप्रकाश सिंह तक हमें ऐसे अधिकारी मिले हैं जिनका अब तक का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा हुआ है। जबकि इनसे पहले गाज़ियाबाद में आये अधिकतर अधिकारियों की पहचान या तो उनकी जातियों से होती थी या फिर सत्तापक्ष से उनकी निकटता से। इन नवनियुक्त अधिकारियों ने भी गाज़ियाबाद में नियुक्ति के साथ ही अपनी कार्यशैली से लोगों को प्रभावित करना शुरू कर दिया। जिलाधिकारी मिनिस्ती एस ने शहर में अतिक्रमण के खिलाफ युद्ध स्तर पर कार्यवाही शुरू कर दी जिसमें उन्हें जीडीए की उपाध्यक्ष कंचन वर्मा और नगरायुक्त चन्द्रप्रकाश सिंह का भरपूर समर्थन मिल रहा है और इन सब के ऊपर मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार का हाथ है।

अतिक्रमण और रिहायशी इलाकों में चल रही दुकानों पर सीलिंग के खिलाफ प्रशासन की यह सख्ती विभिन्न अदालतों द्वारा दिए गए आदेशों के तहत ही हैं। ये आदेश पिछली सरकारों के कार्यकाल में सरकारी फाइलों की धूल फांक रहे थे, नतीजतन, गाज़ियाबाद में अब शायद ही कोई ऐसी सरकारी संपत्ति बची हो जिसपर अतिक्रमण न हुआ हो। शहर के किसी भी इलाके में निकल जाइए, आप को चारों तरफ सड़क किनारे बनी दुकानें और झुग्गियां, कोठियों के बाहर नालों को पाटकर बनाये गए रैम्प और उनपर रखे जनरेटर, दुकानों के बाहर सड़क के किनारों तक सज़ा सामान आदि ही नज़र आयेंगे।

अधिकारियों की इस अतिक्रमण विरोधी कार्यवाही के बाद जनता की प्रतिक्रिया स्वाभाविक ही है। जहाँ शहर की ज्यादातर जागरूक जनता अतिक्रमण विरोधी अभियान से खुश हैं वहीं इससे प्रभावित लोग सड़कों पर उतर आये हैं। अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी हो रही है। इन अधिकारियों की कानून सम्मत कार्यवाही का समर्थन देने के बजाए हमारे जनप्रतिनिधि भी इन अतिक्रमणकारियों के समर्थन में उतर आये हैं। सांसद और केन्द्रीय राज्य मंत्री वी. के. सिंह से लेकर विधायक व राज्यमंत्री अतुल गर्ग तक इन अतिक्रमणकारियों के समर्थन में खुल कर आ गए हैं। सांसद महोदय शान से कहते हैं कि उन्होंने मंडलायुक्त, डीएम और जीडीए की वी.सी को बुलाकर उनकी जमकर क्लास ली। विधायक कह रहे हैं कि चिंता की कोई बात नहीं अब सीलिंग और अतिक्रमण विरोधी कार्यवाही नहीं होगी।

मैं इन जनप्रतिनिधियों से पूछना चाहता हूँ कि आपकी ऐसी कौन सी मजबूरी है जो आपको गैर कानूनी काम कर रहे चंद लोगों के साथ खड़ा होने पर मजबूर कर रही है? क्या कारण है कि आप नियमानुसार काम कर रहे अधिकारियों के विरोध में खड़े हैं? कहीं यह आपका अपना वोट बैंक खो देने का डर तो नहीं? क्या आप को लगता है कि सरकारी जमीन पर कब्ज़ा कर मंदिर-मस्जिद, झुग्गी-झोपड़ियाँ, खोखे और दुकानें बनाना कानूनन सही है? क्या कानून हमें रिहायशी मकान में दुकान चलाने की इजाजत देता है? अगर नहीं, तो फिर आप इन अधिकारियों के काम में रोड़े क्यों अटका रहे हैं? अगर आपको अपने वोट बैंक की इतनी ही चिंता है तो आप अतिक्रमण को सरकारी मान्यता देने के लिए कानून बनाइए। अगर आपको लगता है कि अधिकारी गलत काम कर रहे हैं तो उनके खिलाफ मुकदमें दर्ज कर उन्हें कानून के तहत सज़ा दिलवाएं। अगर आप इन ईमानदार और न्यायप्रिय अधिकारियों का नैतिक समर्थन नहीं कर सकते तो कम से कम ऐसे बयान तो न दें जिनसे इनके मनोबल पर विपरीत असर पड़े।

अंत में मैं हमारा गाज़ियाबाद के पाठकों और गाज़ियाबाद की जागरूक जनता से अपील करना चाहूँगा कि वे हर उस अधिकारी, जो नियम और कानून के तहत काम कर रहा हो, के समर्थन में खुलकर आयें। सोशल मीडिया आज एक बहुत बड़ी ताकत बन चुका है, उसका प्रयोग आप इन अधिकारियों के लिए जन समर्थन एकत्र करने में कर सकते हैं। अधिकारियों से मेरा कहना है कि आप बिना किसी डर के काम किए जाएँ, गाज़ियाबाद की न्यायप्रिय जनता आपके हर न्याय सम्मत कदम में आप के साथ कंधे से कन्धा मिलकर काम करने को तैयार है।

जय हिन्द
आपका अपना
अनिल कुमार

By अनिल कुमार (पब्लिशर व एडिटर-इन-चीफ) : Thursday 26 अप्रैल, 2018 01:56 AM