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योगी के गड्ढा मुक्त सड़कों का सपना पूरा कर सकता है यह ड्रैगन

योगी के गड्ढा मुक्त सड़कों का सपना पूरा कर सकता है यह ड्रैगन

गाज़ियाबाद | उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 जून तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने का वादा किया था। मगर विभिन्न सरकारी विभागों की सुस्ती व उत्तर प्रदेश में सड़कों की अत्यंत ख़राब हालत के कारण योगी का यह सपना पूरा नहीं हो पाया और अब विपक्षी दल व मीडिया का एक वर्ग योगी की खिल्ली उड़ाने में लगा हुआ है। लेकिन हमेशा की तरह समाज और देश के निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाते हुए “हमारा गाज़ियाबाद” की टीम के सदस्यों ने एक ऐसी मशीन खोज निकाली है जिसे हर नगर निगम के स्तर पर खरीद कर उस इलाके की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने में मदद मिल सकती है। इस मशीन का नाम पायेथान है और इसकी कीमत करीब 1.25 करोड़ रुपया प्रति मशीन है।

कैसे करेगा पायेथान सड़कों को गड्ढा मुक्त?

पायेथान नाम की इस मशीन में इस मशीन में एक छोटा हॉट रेडी मिक्स प्लांट, एयर कम्प्रेसर और कॉम्पेक्टर, रोड रोलर यानि सड़क के गड्ढे भरने के लिए जरूरी सभी सामान एक ही स्थान पर उपलब्ध है। इस मशीन को 3-4 आदमियों की मदद से चलाया जा सकता है। इस मशीन में गड्ढे भरने के लिए जरूरी रोड़ी आदि रखने की भी जगह है।

सबसे पहले गड्डे को एयर कंप्रेसर की मदद से साफ़ किया जाता है, फिर उसमें रोड़ी भरकर कॉम्पेक्टर की मदद से उसे समतल किया जाता है। उसके बाद मशीन में ही लगे रेडी मिक्स प्लांट की मदद से उसपर गर्म तारकोल का मिक्सचर डालकर उसे रोड रोलर की मदद से दबा दिया जाता है। यह मशीन एक बार में लगभग 5 टन हॉट मिक्स लेकर जा सकती है।

इस मशीन में करीब 100 लीटर गर्म तारकोल भी रखा जा सकता है। इस मशीन में 20 सीएफएम का एक कंप्रेसर लगा हुआ है। 6.7 लीटर के कमिन्स डीजल इंजन से चलने वाली है मशीन करीब 80 किलोमीटर की रफ़्तार से दौड़ भी सकती है।

हर जिले और नगर निगम में हो एक पायेथान

उत्तर प्रदेश सरकार हर साल सड़कों के गड्ढे भरने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है। अकेले गाज़ियाबाद में ही सड़क रिपेयर और मेंटिनेंस के लिए हर साल कई करोड़ रुपयों के ठेके छोड़े जाते हैं। अगर सरकार चाहे तो वह हर जिले में निगम स्तर पर एक-एक मशीन खरीद कर दे सकती है। बंगलुरु नगर निगम समेत कई नगर निगमों में यह मशीन पिछले कई सालों से सफलता पूर्वक काम कर रही है। फ़िलहाल यह मशीन ब्रिटेन से आयात की जा रही है, लेकिन अगर केंद्र सरकार की मदद ली जाये तो इसे भारत में ही बनाया जा सकता है। भारत में सड़कों के नेटवर्क और उनकी देखरेख पर होने वाले खर्च को देखकर कोई भी उद्यमी इस मशीन को देश में ही बनाने के लिए तैयार हो जायेगा।

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