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गाज़ियाबाद के पार्को की कहानी : निगम की दिव्यदृष्टि के इन्तजार में हिंडन इको पार्क

गाज़ियाबाद के पार्को की कहानी : निगम की दिव्यदृष्टि के इन्तजार में हिंडन इको पार्क

गाज़ियाबाद। गाज़ियाबाद के पार्कों की अगली कड़ी में आपको रूबरू कराते हैं, दिल्ली की यमुना से भी कहीं ज्यादा प्रदूषित गाज़ियाबाद की हिंडन नदी के किनारे एक बड़े भूभाग में फैले हिंडन इको पार्क से।

बदहाली की इबारत लिख रहा पार्क

हिंडन नदी के किनारे करीब 14 एकड़ में फैले इस पार्क का लोकार्पण 22 फ़रवरी 2012 को मेरठ मंडल के तत्कालीन आयुक्त भुवनेश कुमार ने ने किया। पार्क के बगल में ही साईं उपवन मौजूद है। इसी के एक हिस्से को अलग कर हिंडन इको पार्क की स्थापना की गई। पार्क बाहर से दिखने में तो बहुत ही सुंदर और हरा भरा नजर आता है लेकिन जब इसके अंदर आप जाते हैं तो कहानी उलटी हुई नजर आती है। पार्क में सुरक्षा के लिहाज से लगाईं गई बाड़ जगह-जगह से टूट चुकी है। पार्क में मौजूद सुरक्षा गार्ड नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि पार्क में दीवार न होने से आए दिन पार्क के अन्दर कुछ असमाजिक तत्व भी आ जाते हैं। साथ ही साईं उपवन में टहलने वाले हिंसक पशु भी इस पार्क में आ जाते हैं, जिससे हर समय असुरक्षा की भावना बनी रहती है।

पार्क के बगल से गाज़ियाबाद शहर के सीवर का पानी हिंडन नदी में गिरता है, उसकी दुर्गन्ध और पार्क के चारों तरफ नगर निगम द्वारा फेंके जाने वाले कचरे के ढेर पार्क से जल्द जाने के लिए मजबूर कर देते हैं। पार्क के बगल में मौजूद साईं उपवन में खुले में गाज़ियाबाद के सीवरों की गन्दगी बहती है और हिंडन में मिलती है, इस पानी से पार्क के अंदर मौजूद पौधों को भी नुकसान होता है। फलस्वरूप समय-समय पर होने वाले पौधरोपण अभियान के बावजूद भी पार्क के अन्दर पौधों की उपस्थिति न के बराबर नजर आती है।

बिजली और पानी किसी भी जगह के बुनियादी मुद्दे होंते हैं, लेकिन हिंडन इको पार्क इन मुद्दों से अभी भी काफी दूर है, पार्क की स्थापना के समय पार्क में सौर ऊर्जा से जलने वाली लाइटें लगाई गयी थी, जिनमे सब की सब ख़राब हो चुकी हैं, सुरक्षा गार्ड का कहना है कि दिन में तो सब ठीक रहता है लेकिन शाम होते ही पार्क बेदम हो जाता है, और घनघोर अंधियारे में डूब जाता है। कुछ साल पहले यहाँ पर बिजली लाने की बात कही जा रही थी लेकिन सालों गुजर जाने के बाद भी अब तक कोई जमीनी कार्यवाई नहीं हुई है। पार्क पेयजल में हो रही किल्लत को देखते हुए तीन साल पहले पार्क में हैण्डपंप लगाया गया लेकिन गुणवत्ता और रख-रखाव के अभाव में वह दम तोड़ता नजर आ रहा है। पार्क के अन्दर मौजूद मालियों का कहना है की पार्क में सुरक्षा दीवार न होने से पार्क के अन्दर लगे पेड़-पौधों को अक्सर साईं उपवन के पशु आकर खा जाते हैं।

पार्क में लगे फव्वारे पानी और बिजली के अभाव में अपना अस्तित्व खो रहे हैं। पार्क के अन्दर मौजूद कुछ लोगों का कहना है कि, शहर से एकदम अलग मौजूद इस पार्क को अगर नगर निगम संवार दे तो यहाँ पर लोगों की आवाजाही को बढाया जा सकता है। मसलन पार्क की चहारदीवारी बनवा दी जाए, पार्क तक जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था हो जाए, पार्क के अन्दर खाने पीने की व्यवस्था हो जाए, पार्क में झूले लग जाए, तो पार्क के अन्दर लोग आना जाना शुरू कर देंगे, फलस्वरूप टिकट लगाकर पार्क से निगम को राजस्व की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही शहर का एक और उपेक्षित पार्क अपना अस्तित्व पुनः वापस ला सकता है।

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By दुर्गेश तिवारी : Tuesday 26 सितंबर, 2017 05:38 AM