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शरीयत के हिसाब से तीन तलाक गलत नहीं:-शबनम सिद्दीक़ी

शरीयत के हिसाब से तीन तलाक गलत नहीं:-शबनम सिद्दीक़ी

गाजियाबाद। तीन तलाक के मुद्दे पर मंगलवार को मेवाड़ कॉलेज में एक सेमिनार का आयोजन हुआ। इस संगोष्ठी में तलाक गलत है या सही इस मुद्दे पर चर्चाएँ हुई। समाजशास्त्री शबनम सिद्दीक़ी ने सभागार में उपस्थित मेवाड़ परिवार के सदस्यों व विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहां कि शरीयत के हिसाब से तीन तलाक गलत नहीं है। लेकिन इसकी आड़ में तलाक देना गलत है। तलाक पीड़ित महिलाओं का आवाज़ उठाना सही है।

इसे भविष्य में दोहराया न जाये, इसके लिए नई पीढ़ी को शिक्षित करना बेहद जरूरी है। मेवाड़ परिवार के सदस्यों व विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तलाक देने की प्रक्रिया बेहद सख़्त है शरीयत के हिसाब से तलाक देने की कुछ शर्तें होती हैं। इसका पालन किये बिना तलाक नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मुस्लिम ही नहीं हर तबके में तलाक जैसे मामले बढ़ रहे हैं। विदेशों में भी तलाक देने के मामलों में वृद्धि हुई है इसे रोकना जरूरी है।

मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि इस विषय को साम्प्रदायिक तरीके से न देखा जाए। महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। इसलिए अब तलाक जैसे मामलों को नये तरीके से सोचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि तलाक जैसे अभिशाप से मुक्ति पाने के लिए पढ़ाई-लिखाई और जागरूकता लोगों में लानी होगी। बच्चों के हाथों को ताकतवर बनाना होगा ताकि वे आत्मनिर्भर बन अपने भविष्य का निर्माण खुद कर सकें।

इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने कहा कि अगर पति-पत्नी साथ नहीं रह सकते तो वैधानिक तरीके से अलग होने में कोई बुराई नहीं है। गरीबी और अशिक्षा की वजह से महिलाएं परेशान हैं। इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए उनका आत्मनिर्भर होना और शिक्षित होना बेहद जरूरी है।

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By मोहित शर्मा : Saturday 23 सितंबर, 2017 18:15 PM