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गाज़ियाबाद जंक्शन: दिव्यांगों के लिए चुनौतियों से भरा है प्लेटफ़ॉर्म तक का ‘रास्ता’

गाज़ियाबाद जंक्शन: दिव्यांगों के लिए चुनौतियों से भरा है प्लेटफ़ॉर्म तक का ‘रास्ता’

गाजियाबाद। अंग्रेजों के हाथों 1864 में बनवाया गया गाजियाबाद स्टेशन आज असुविधाओं का गुलाम है। दिल्ली-लखनऊ-हावड़ा रेल मार्ग पर स्थित गाजियाबाद स्टेशन पर दिव्यांगों के लिए सुविधाएँ ना के बराबर हैं। एक महानगर के अहम स्टेशन के बावजूद यहाँ की असुविधाएँ आपको हैरान कर सकती हैं। इस स्टेशन पर प्रतिदिन कई दिव्यांग प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँचने के लिए मशक्कत करते हुए दिखते हैं। सबसे ज्यादा मुश्किल यहाँ के फुट ओवर ब्रिज को लेकर है, जिसे किसी भी प्लेटफोर्म पर पहुँचने के लिए पार करना सभी की मजबूरी है। आम यात्री तो ठीक लेकिन निःशक्त लोगों को इसे पार कर पाना यात्रा से भी बड़ी चुनौती है। इसके अलावा टिकट काउंटर और पूछताछ केंद्र पर बने दिव्यांग स्पेशल विंडो भी हमेशा बंद रहते हैं, जिनका होना या ना होना बराबर है।
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शहर के सभी जरूरी स्थानों पर दिव्यांगों की सुविधाओं को लेकर ‘हमारा गाजियाबाद’ की पड़ताल में गाजियाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन पर पहुँचने पर वहां भारी अव्यवस्था दिखी। छह प्लेटफ़ॉर्मों वाले इस स्टेशन में समय के साथ कई बदलाव किये गये हैं। इस वजह से स्टेशन की आज की संरचना में मुख्य प्लेटफ़ॉर्म बीच में पहुँच गये हैं। मसलन स्टेशन के दोनों ओर से आने पर आपको प्लेटफ़ॉर्म तक पहुँचने के लिए ओवरब्रिज का सहारा लेना ही होगा।

मुख्य शहर की ओर से प्रवेश करने में स्टेशन के टिकेट काउंटर जो बमुश्किल जमीनी सतह से 2 फुट ऊपर है वहां दिव्यांगों के लिए रैम्प बनवाया गया है लेकिन 15 फीट उपर ब्रिज तक जाने के लिए सीढ़ियों के अलावा कोई चारा नहीं। एस्केलेटर या प्लेटफ़ॉर्म तक पहुँचने के लिए अंडरपास जैसी कानूनन जरूरी चीजे गाजियाबाद को कब नसीब होंगी पता नहीं। कहने को तो गाजियाबाद के सांसद वीके सिंह केंद्र सरकार में एक अहम मंत्रालय में तैनात हैं। और अगर वो चाहें तो सुरेश प्रभु के अधीन रेल मंत्रालय की इन सुविधाओं पर ध्यान दे सकते हैं। लेकिन ऐसा कब होता है ये देखने की बात है।


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