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इन्टरनेट पर लिंग परीक्षण विज्ञापन मामले को लेकर SC ने केंद्र को दिए निर्देश

इन्टरनेट पर लिंग परीक्षण विज्ञापन मामले को लेकर SC ने केंद्र को दिए निर्देश

नई दिल्ली . बच्चे के लिंग जांच को लेकर इंटरनेट पर उपलब्ध तमाम जानकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ निर्देश जारी किये है। हालांकि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और याहू जैसे सर्च इंजन से ऐसे विज्ञापन हटाने का आदेश दे चुका है। बीते समय में कोर्ट ने इस तरह के सर्च को ब्लॉक करने को भी कहा था.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में साबू मैथ्यू जार्ज नाम के शख्स ने याचिका दाखिल कर सर्च इंजन में गर्भ में शिशु के लिंग जांच से जुड़े विज्ञापनों का मसला उठाया था। जिसके बाद इसपर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और याहू के साथ बैठक कर मामले का हल निकालने को कहा था.

सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद कंपनियों ने ऐसे विज्ञापन हटाने की बात कही थी. साथ ही उन्होंने कहा था कि वो 43 ऐसे की-वर्ड को ब्लॉक लिस्ट में डालने को तैयार हैं, जिनका इस्तेमाल कर लोग आसानी से ऐसे  विषयों को ढूंढा करते  है।

याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार लिंग जांच सम्बन्धी अनेक जानकारी अबतक सर्च इंजन पर मौजूद हैं। गूगल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कंपनी ने काफी सामग्री ब्लॉक की है।जितनी सख्ती की मांग याचिकाकर्ता कर रहे हैं वो व्यवहारिक नहीं है। जानकारी लेना लोगों का संवैधानिक हक है. इस पर बहुत ज़्यादा पाबंदी नहीं लगाई जानी चाहिए. इससे सर्च इंजन का व्यापार भी प्रभावित होता है।

दो जजों की बेंच के अध्यक्ष जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, “देश में लिंग अनुपात चिंताजनक है. इसे बेहतर बनाने के लिए कड़े कदम उठाने की ज़रूरत है”। सुप्रीम कोर्ट ने आज अंतरिम आदेश देते हुए केंद्र को जल्द से जल्द इस मसले पर एक नोडल एजेंसी का गठन करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि सरकार इस एजेंसी और इसके काम की जानकारी लोगों तक पहुंचाए। मामले की अंतिम सुनवाई 17 फरवरी 2016 को होगी।

 

 

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