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नाटक “मुक्ति बंधन” में कलाकारों ने दिखाई समाज की संकीर्ण सोच

नाटक “मुक्ति बंधन” में कलाकारों ने दिखाई समाज की संकीर्ण सोच

गाज़ियाबाद। रूढ़िवादिता, दास-प्रथा, ऊँच-नीच, भेद-भाव और विधवा-विवाह पर कटाक्ष करते नाटक “मुक्ति बंधन” में समाज की संकीर्ण सोच को कलाकारों ने शानदार अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। नाटक का लेखन व सफल निर्देशन अदिति उन्मुक्त ने किया। हिंदी भवन में होप्स थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने नाटक मुक्ति बंधन में सशक्त अभिनय किया। नाटक में दर्शाया गया कि गांव में ठाकुर से कर्जे लिए हुए लोगों को अपने घर में शादी ब्याह करने की अनुमति नहीं थी। राधे नाम का कर्जदार बिना ठाकुर और ठकुराईन की आज्ञा के विवाह कर लेता है जिससे नाराज़ ठाकुर उसे मौत के घाट उतरवा देता है। गांव में ऊँचनीच, जातिवाद को भी ठाकुर और ठकुराईन बढ़ावा देते हैं छोटी जात के लोगों के बच्चों को स्कूल में पढ़ने का कोई अधिकार ठाकुर ने नहीं दिया था। इस दौरान ठाकुर का बेटा बलदेव शहर से गांव आता है तो वह अपने पिता के खिलाफ जाकर गांव में जात-पात, ऊँच-नीच के भेदभाव को खत्म करने की कोशिश करता है। इस बात से नाराज़ ठाकुर अपने बेटे को घर से निकाल देता है। एक रोज ठाकुर बीमार पड़ता है, गांव वाले उसके स्वस्थ होने के लिए पूजा पाठ करते हैंतब ठाकुर को एहसास होता है कि जो भी वो कर रहा था वह गलत था। इस बीच बलदेव गांव की विधवा से विवाह कर लोगों को संदेश देता है कि विधवाओं के प्रति हमें अपनी सोच को बदलना चाहिए। हर विधवा को फिर से अपना घर बसाने का अधिकार मिलना चाहिए। कोई इंसान और जात छोटी नहीं होती, छोटी होती है हमारी सोच, और इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है।

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गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित इस नाटक और इसके डायलॉग्स को दर्शकों ने बेहद सराहा। ठाकुर का पात्र तेजवीर निर्वाण और बलदेव की भूमिका में मनीष गुप्ता ने सशक्त अभिनय किया। ठकुराइर्न की भूमिका में अदिति उन्‍मुक्‍त ने प्रभावशाली अभीनय किया। अन्य पात्रों में बबीता, पूनम, नीरज, आमिर, नवीन वसागरने प्रभावपूर्ण अभिनय किया। इस नाटक का मंचन सैनी कुशवाहा वेलफेयर सोसायटी द्वारा कराया गया।

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By हमारा गाज़ियाबाद ब्यूरो : Saturday 23 सितंबर, 2017 18:24 PM