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कितने प्रासंगिक हैं सरकारी स्कूल – बाल दिवस पर गाजियाबाद के सरकारी स्कूलों पर एक रिपोर्ट

कितने प्रासंगिक हैं सरकारी स्कूल – बाल दिवस पर गाजियाबाद के सरकारी स्कूलों पर एक रिपोर्ट

गाज़ियाबाद | आज पूरे देश में बाल दिवस मनाया जा रहा है तो हमने सोचा क्यों न गाज़ियाबाद के सरकारी स्कूलों की दशा पर भी ध्यान दिया जाए। सिर्फ गाज़ियाबाद शहर में ही प्राथमिक स्तर के 93 स्कूल चल रहे हैं जिनमें 305 शिक्षक कार्यरत हैं। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 सितंबर 2014 तक इन स्कूलों में 8,606 बालिकाएँ और 8,913 बालक यानि कुल 17,519 बच्चे पढ़ रहे थे। मोटे तौर पर देखा जाए तो एक शिक्षक के जिम्मे 57 विद्यार्थी आते हैं जो की शिक्षा विभाग के मानक (40 विद्यार्थी) से कुछ ही अधिक है। मगर जब हमने हर स्कूल के ब्योरे को गंभीरता से देखा तो पाया की अधिकतर स्कूलों में वस्तुस्थिति बहुत ही दयनीय है। गाज़ियाबाद शहर में 8 स्कूल ऐसे चल रहे हैं जहाँ एक अध्यापक के जिम्मे 150 से अधिक विद्यार्थी हैं। सबसे बदतर स्थिति करहेड़ा स्थित प्राथमिक विद्यालय की है वहाँ कुल 555 विद्यार्थियों को मात्र 3 शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं यानि एक शिक्षक के जिम्मे 185 से भी अधिक विद्यार्थी हैं। इसके अतिरिक्त 16 स्कूल ऐसे हैं जहाँ हर शिक्षक के जिम्मे 70 से अधिक विद्यार्थी हैं। ऐसे टाप 10 स्कूलों के आँकड़े कुछ इस प्रकार हैं।

Government-School-Reportपरेशानी सिर्फ यह नहीं है की बच्चों और टीचर का अनुपात ठीक नहीं है, बल्कि समस्या यह भी है की टीचरों से दूसरे कई विभागों के काम भी लिए जाते हैं। सरकारी स्कूल के अध्यापकों से जनगणना, चुनाव, सेमिनार, पोषाहार, एमडीएम प्रभारी, नोडल पोस्टमैन, एसएमसी सचिव, स्वस्थ सर्वे, साक्षारता सर्वे, पल्स पोलियो, पशु गणना आदि दर्जनों ऐसे काम कराये जाते हैं जिनका बच्चों की शिक्षा से कोई लेना देना नहीं है। जरा सोचिए की एक शिक्षक जिसके जिम्मे 185 विद्यार्थी हैं अगर वो शिक्षा का काम छोड़ कर चुनाव ड्यूटी पर या फिर किसी सर्वे को करने चला जाए तो उसके विद्यार्थियों का क्या हाल होगा।
अभी तो हम सिर्फ शिक्षकों और छात्रों के अनुपात पर ही चर्चा कर रहे हैं। अगर हम इन स्कूलों में पढ़ाई जा रही शिक्षा के स्तर या फिर इन्फ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो स्थिति बहुत ही भयावह नज़र आती है। लगभग सभी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग से टायलेट की व्यवस्था नहीं है। बहुत से स्कूल तो ऐसे हैं जहाँ टायलेट की बात तो दूर बच्चों के बैठने के लिए कमरे तक नहीं है और अगर हैं भी तो बहुत ही टूटी-फूटी हालत में। स्कूलों में हेडमास्टर को कोई वित्तीय अधिकार नहीं हैं, यानि अगर वह स्कूल में छोटी-मोटी मरम्मत का काम करना भी चाहे तो उसे मंजूरी के लिए अनेक सरकारी विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कुछ निजी संस्थान जैसे इंडस्ट्रियल मेनुफक्चरिंग एसोसेशियन (गाज़ियाबाद) जरूर मदद के लिए आगे आए हैं, मगर उनकी संख्या भी बहुत कम है।

असल में प्राथमिक शिक्षा ही किसी व्यक्ति के जीवन की वह नींव होती है, जिस पर उसके संपूर्णजीवन का भविष्य तय होता है, लेकिन दुख इस बात का है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-अप्रैल, 2010 से प्रभावी तौर पर लागू है और इस अधिनियम को लागू हुए लगभग पाँच साल हो गए, लेकिन शिक्षा को लेकर जो हमारा सपना था वो कहीं भी रूप लेता नहीं दिख रहा।

गाज़ियाबाद जिले में सरकारी स्कूलों किए हालत को देखते हुए हमारा गाज़ियाबाद की टीम ने यह निर्णय लिया है की हम पूरे जिले के हर स्कूल में जाएंगे और वहाँ की वस्तुस्थिति से अपने पाठकों और जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों को रूबरू कराएंगे। इस अभियान की शुरुआत करने के बाल दिवस से बेहतर कोई और दिन नहीं हो सकता। हमारी कोशिश रहेगी की हम सोमवार से आप को गाज़ियाबाद के किसी एक सरकारी स्कूल के बारे में बताएं, इस संबंध में हमें आप के सहयोग की आवश्यकता है। आप भी अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूल में जाएँ और वहाँ की वस्तुस्थिति के बारे में हमें बताएं। आप यह जानकारी हमें editor@hamaraghaziabad.com पर ईमेल के द्वारा या फिर 70655 18045 पर फोन के माध्यम से दे सकते हैं।

By विशाल पंडित : Saturday 23 सितंबर, 2017 16:25 PM