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उज्ज्वला गैस योजना – सरकार मुफ्त नहीं कर्जे पर बाँट रही थी गैस सिलेन्डर

उज्ज्वला गैस योजना – सरकार मुफ्त नहीं कर्जे पर बाँट रही थी गैस सिलेन्डर

गाज़ियाबाद | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्ज्वला गैस योजना को अपनी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताते हैं। सरकार के अनुसार इस योजना के तहत मिलने वाले “मुफ्त गैस कनैक्शन” ने देश की करोड़ों गरीब महिलाओं की जीवन शैली बदल दी है। मगर क्या आप जानते हैं कि योजना के तहत मिलने वाला सिलेन्डर न तो मुफ्त है और न ही उस पर अनुदान (सब्सिडी) दी जाती है। हालांकि सरकारी दावों के अनुसार हर गैस कनैक्शन पर ₹1,600 रुपए का अनुदान दिया जाता है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है।

उज्जवला गैस योजना के तहत किसी भी लाभार्थी को गैस कनेक्शन लेते ही कुल ₹1,750 रुपये चुकाने पड़ते हैं। यह राशि चूल्हे (₹990) और पहले गैस सिलेन्डर (₹760) के बदले ली जाती है। हालांकि यह सब अप्रत्यक्ष रूप से होता है क्योंकि सरकार पहले छह सिलेंडरों कि रिफलिंग पर मिलने वाली सब्सिडी खुद रख लेती हैं और उससे नए उपभोक्ता को मिलने वाले कर्ज की भरपाई होती है। हकीकत में सरकार गरीबों को मुफ्त में सिर्फ रेग्युलेटर और छोटा सा गैस पाइप ही देती है जो बाज़ार में आसानी से ₹150 में मिल जाता है।

हमारे इस दावे की पुष्टि इस बात से हो जाती है कि योजना के उपभोक्ताओं को पहले छह सिलेन्डर बाज़ार भाव से रिफिल कराने होते हैं, जिनकी कीमत ₹700 से 900 के बीच है। मतलब सरकार पहले छह सिलेंडर की रिफिलिंग के दौरान हर ग्राहक से लगभग ₹1740 वसूल लेती हैं। यही वजह है कि अधिकांश उज्ज्वला योजना के उपभोक्ता दूसरी बार सिलेंडर नहीं भरवाते हैं। इसके अलावा करीब 50% उपभोक्ता ही हर दो महीने पर रिफिल करवाते हैं। जबकि करीब 30% उपभोक्ता तीन-चार महीने में एक बार रिफिल करवाते हैं। अँग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सरकार की जब यह योजना फेल होने लगी तो चुनावी साल में अप्रैल 2018 से उज्ज्वला योजना के पहले छह गैस सिलेंडरों पर भी सब्सिडी देने का फैसला किया गया है। यानी सरकार ने ₹1750 की सब्सिडी (कर्ज) की रिकवरी फिलहाल टाल दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया में शुरू की गई इस योजना में ग्रामीण क्षेत्र की बीपीएलधारी महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखा गया है ताकि खाना बनाने के दौरान वो धुएँ से परेशान न हों। योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर कर रही करीब 5 करोड़ महिलाओं को गैस कनेक्शन देना है। इस योजना के तहत सिर्फ वे महिलाएं ही आवेदन कर सकती हैं जिनका नाम बीपीएल सूची में है। इसके अलावा आवेदक का नाम सामाजिक-आर्थिक जातीय जनगणना-2011 की लिस्ट में भी नाम होना चाहिए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 24 करोड़ घरों में लगभग 10 करोड़ परिवार का चूल्हा लकड़ी, कोयला या उपले से जलता है, जिसे इस योजना से दूर किया जाना है।

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