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यूपी में छुपे हैं बड़े-बड़े टैक्स चोर, दो अलग-अलग छापों में मिली ₹80 करोड़ की कर अपवंचना

यूपी में छुपे हैं बड़े-बड़े टैक्स चोर,  दो अलग-अलग छापों में मिली ₹80 करोड़ की कर अपवंचना

गाज़ियाबाद | इस बात में कोई शक नहीं कि अपने उत्तर प्रदेश के कानपुर, नोएडा और गाज़ियाबाद जैसे औद्योगिक शहर में देश के अधिकांश नेताओं और बाबुओं की काली कमाई खपाने का बड़ा अड्डा रहे हैं। यहाँ की अधिकांश पौश कॉलोनियों में देश के बड़े-बड़े नेताओं और अधिकारियों की नामी और बेनामी संपत्तियाँ हैं। यही कारण है कि ये शहर हमेशा इनकम टैक्स विभाग के रडार पर रहते हैं और यहाँ आए दिन छापेमारी की घटनाएँ होती रहती हैं।
ऐसी ही एक छापेमारी में बुधवार को प्लाईवुड और ग्लास (कांच) उत्पादन के दो दिग्गज समूह आयकर विभाग के निशाने पर आ गए। आयकर विभाग ने लक्ष्मी ग्रुप और बावा ग्रुप के देशभर में फैले 23 परिसरों पर एक साथ छापेमारी की। पांच शहरों में चल रही इस कार्यवाही में 300 से ज्यादा आयकर अधिकारियों को शामिल किया गया है। सूत्रों के मुताबिक करीब 80 करोड़ रुपए की कर अपवंचना का मामला है।

आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार बावा फ्लोट ग्लास ग्रुप और लक्ष्मी फ्लोट ग्लास ग्रुप नोटबंदी के बाद से ही आयकर विभाग के निशाने पर थे। कानपुर में जरीब चौकी स्थित बावा फ्लोट ग्लास लिमिटेड मुख्य कंपनी है। इसके मालिक राधा कृष्ण अग्रवाल, वृंदावन बिहारी अग्रवाल और पूनम अग्रवाल हैं। मुख्य कारोबार शताब्दी प्लाई बनाना, शताब्दी डोर बनाना, कांच के आइटम बनाने के अलावा रीयल इस्टेट का बड़ा बिजनेस है। बावा ग्रुप की कुल 19 फर्में हैं। इनमें से 11 फर्में रीयल इस्टेट का कारोबार देखती हैं। समूह के ज्यादातर रीयल इस्टेट प्रोजेक्ट बरसाना और बिहारी के नाम से हैं। स्वरूप नगर का बेहद पॉश अपार्टमेंट ‘सेवन बंगलोज’ भी उन्हीं का है। छापे की जद में आई दूसरी कंपनी लक्ष्मी ग्रुप के मुखिया लक्ष्मी नारायण अग्रवाल हैं। इस कंपनी में 11 निदेशक हैं। इसी की एक अन्य फर्म हिन्दुस्तान ग्लास वर्क्स लिमिटेड भी है। इलाहाबाद के पास बंगरौली के पास इकाई है, जहां ग्लास की बहुत बड़ी फैक्ट्री है। यहां से पूरे उत्तर भारत में बड़े पैमाने पर माल की सप्लाई की जाती है।

आयकर विभाग समूह की वित्तीय गतिविधियों की सूक्ष्म निगरानी कर रहा था। लेनदेन से लेकर आयकर रिटर्न संदेह के दायरे में थे। रीयल इस्टेट में किए गए निवेश में भारी गोलमाल किया गया था। कीमतों को कौड़ियों के भाव दिखाया जा रहा था। इसी आधार पर प्रधान आयकर निदेशक जांच अमरेन्द्र कुमार और संयुक्त आयकर निदेशक जांच अमरेश तिवारी के निर्देश पर उप निदेशक जांच अमरेन्द्र शिवनाथ, उप निदेशक जांच वेद प्रकाश, सहायक निदेशक केके मिश्रा, सौरभ आनंद के नेतृत्व में अंकित तिवारी, आयकर अधिकारी आलोक गुप्ता, एम के कटियार, निरीक्षक शरद प्रकाश अग्रवाल और डीके तिवारी सहित 300 से ज्यादा अधिकारियों ने छापे मारे। केवल दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में ही 150 अधिकारी परिसरों की जांच पड़ताल कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार अभी भी कानपुर में सात जगह छापेमारी चल रही है। इसमें जरीब चौकी स्थित बाबा फ्लोट ग्लास का मुख्यालय ,स्वरूप नगर स्थित घर, कौशलपुरी, बीएन मार्केट, डिप्टी पड़ाव, रूमा और परमपुरवा स्थित आफिस, गोदाम व फैक्ट्रियां हैं। दिल्ली में आठ परिसरों में छापे मारे गए हैं। इलाहाबाद में दो, गाजियाबाद और नोएडा में चार और देहरादून के दो ठिकानों को जांच की जद में लिया गया है।

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