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जीएसटी की बदौलत लौट आया इक्का-बैलगाड़ियों का दौर – जानिए कैसे !

जीएसटी की बदौलत लौट आया इक्का-बैलगाड़ियों का दौर – जानिए कैसे !

गाज़ियाबाद | क्या आपको नहीं लगता कि इन दिनों व्यापारी ऑटो, टेम्पो और ट्रक की बजाए घोड़ागाड़ी, भैंसा बुग्गी, बैलगाड़ी या साइकिल रिक्शा को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं? पहली नज़र से देखने में लगता है कि डीजल और पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों ने व्यापारियों और उद्यमियों को इन गाड़ियों से माल ढोने पर मजबूर किया है मगर हकीकत कुछ और ही है।

दरअसल बैलगाड़ी या घोड़ा-गाड़ी से माल भेजना तोड़ है जीएसटी व्यवस्था के तहत ई-वे बिल की समस्या का। क्योंकि जिन सामानों के परिवहन में मोटर गाड़ी का प्रयोग नहीं हो रहा है उसपर ई-वे बिल नहीं लिया जाता है। जीएसटी के तहत प्रावधानों के मुताबिक, व्यापारियों को 50,000 रुपये या उससे अधिक के वाहन में माल के आवागमन पर जारी ई-वे बिल प्राप्त करना होगा। लेकिन यह नियम गैर मोटर चालित वाहनों, फलों, सब्जियों, मछली और पानी जैसे कुछ सामानों पर लागू नहीं होता है।

हमारे शहर के विभिन औद्योगिक क्षेत्रों और किराना मंडी में ये तरीका धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। ज़्यादातर व्यापारी अब अपने सामान को मिनी ट्रक से माल भेजने के बजाए, अब घोड़े गाड़ियां या फिर हाथ गाड़ियों का उपयोग करते हैं। हालांकि ई-वे बिल 50,000 रुपये से कम मूल्य के सामान के लिए वैकल्पिक व्यवस्था है, लेकिन बेईमान व्यापारी छूट सीमा से ज्यादा का माल एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए गैर मोटर चालित वाहन का उपयोग करते हैं।

कहने का मतलब यह है कि जीएसटी और ई-वे बिल जैसी व्यवस्थाएँ लागू होने से अप्रत्यक्ष कर संरचना तो बदल गई है, लेकिन चालान कम करके दिखाने की बेईमानी वाली गतिविधियां अभी भी चालू हैं। कई व्यापारी जीएसटी बचाने के लिए अपनी सामग्री को “नंबर दो” में खरीदते और बेचते हैं। ई-वे बिल के आने से पहले ऐसे व्यापारी इनवॉइस के साथ माल को भेजा करते थे। जब सामान अपने गंतव्य पर टैक्स इंस्पेक्टरों की नजर से बचकर पहुंच जाता तो खरीददार और विक्रेता दोनों ही जीएसटी से बचने के लिए इनवॉइस को फाड़ देते। जीएसटी में इसी प्रकार हो रही कर चोरी की जांच के लिए ही ई-वे बिल पेश किया गया है।

आपको बता दें कि ई-वे बिल एक ऑनलाइन जेनरेटेड दस्तावेज है जो जीएसटी के तहत राज्य सीमाओं के सामानों के आवागमन के लिए अनिवार्य है। इसने कई चालान, ट्रांजिट पास और रोड परमिट को बदल दिया है और इसकी आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल एप के जरिए इसे आसानी से जेनरेट या रद्द किया जा सकता है।

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