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वृद्ध और दिव्यांगों के लिए हिमालय की चढ़ाई से कम नहीं बैंकों तक पहुँचना

वृद्ध और दिव्यांगों के लिए हिमालय की चढ़ाई से कम नहीं बैंकों तक पहुँचना

गाज़ियाबाद | सार्वजनिक भवनों में दिव्यांग और वृद्ध जनों को होने वाली कठिनाइयों के मद्देनजर केंद्र और राज्य सरकारों ने अनेक दिशा निर्देश जारी किए है। मगर, अन्य सरकारी आदेशों की तरह ही इन दिशा निर्देशों का अनुपालन भी सरकारी तरीके से ही हो रहा है। अगर हम अपने शहर गाज़ियाबाद की बात करें तो अधिकतर सरकारी भवनों, बैंकों, पार्कों, सामुदायिक भवनों और सार्वजनिक स्थलों में भीतर पहुँचने के लिए रैम्प नहीं है। यदि रैम्प बने भी हैं तो उनकी बनावट के कारण उन पर चढ़ पाना व्हील चेयर पर बैठे व्यक्ति तो क्या साधारण व्यक्ति के लिए भी दुर्भर है।

हमारा गाज़ियाबाद की टीम ने शहर के बैंकों का सर्वे किया तो पाया कि अधिकांश बैंकों में रैम्प नदारद हैं, यदि हैं भी तो उन पर चढ़ना किसी दिव्यांग व्यक्ति के लिए असंभव है। बैंको के अंदर बने काउंटरों की ऊंचाई इतनी ज्यादा है कि व्हील चेयर पर बैठा व्यक्ति बैंक कर्मचारियों से बात नहीं कर सकता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि भवनों में नियमों के विरुद्ध निर्माण के बावजूद भी बैंकों को किस आधार पर शाखाएँ खोलने की अनुमति मिल गई है?

क्या हैं दिशा निर्देश
सीपीडबल्यूडी द्वारा सार्वजनिक भवनों को बैरियर फ्री बनाने के लिए जारी दिशा निर्देशों के अनुसार रैम्प की ऊंचाई का अनुपात 1:20 होना चाहिए। व्हील चेयर पर बैठे व्यक्तियों की सुविधाओं के लिए रैम्प के दोनों ओर रेलिंग होनी चाहिए जिसका सहारा लेकर दिवयांग और वृद्धजन बिना किसी की मदद के ऊपर-नीचे जा सकें। रैम्प शुरू होने व खत्म होने तथा सभी दरवाजों पर व्हील चेयर को आसानी से घुमाने के लिए पर्याप्त स्थान हो। इसके अलावा बैंकों में कम से कम एक कैश काउंटर की ऊंचाई इतनी कम हो कि व्हील चेयर पर बैठा व्यक्ति आसानी से लेनदेन कर सके।

क्या कर सकते हैं आप और हम

  • सार्वजनिक स्थलों पर दिव्यांग और वृद्धजनों को बेहतर सुविधाएं दिलाने के लिए हम अपने क्षेत्र के सभी सार्वजनिक भवनों का सर्वे करें और वहाँ पाई गई कमियों के चित्र खींच कर संबधित विभाग के अधिकारियों, जिलाधिकारी, विधायक, सांसद, केंद्र व राज्य सरकारों के दिव्यांग कल्याण मंत्रालयों को पत्र लिखें।
  • सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए हम सोशल मीडिया पर भी कैम्पेन चला सकते हैं। यदि आप कहीं असुविधा देखें तो उसका चित्र खींच कर संबन्धित मंत्रियों के ट्वीटर हैंडल को टैग कर दें।
  • स्थानीय व राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों को पत्र लिखकर समस्याओं की ओर उनका ध्यान आकृष्ट करें।
  • संबन्धित विभाग के अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर समस्या की ओर उनका ध्यान आकृष्ट करें और उनके हुई बातचीत का ब्योरा सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करें। साधारण से मोबाइल फोन से भी ऐसे वार्तालाप की वीडियो रेकॉर्ड की जा सकती है।

 

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