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गाँव की महिलाओं ने मिलकर तीन दिन में बना डाली दो किलोमीटर लंबी सड़क

गाँव की महिलाओं ने मिलकर तीन दिन में बना डाली दो किलोमीटर लंबी सड़क

बांका | बिहार के बांका जिले में ग्रामीण महिलाओं के एक समूह ने वह काम कर दिया जो सरकारें दशकों में नहीं कर पाईं। पटना से दक्षिण-पूर्व में 276 किलोमीटर दूर बांका जिले के बौंसी ब्लॉक के तीन गांवों – नीमा, जोरारपुर और दुर्गापुर – में मात्र 2,000 की आबादी है। यहां कोई सड़क नहीं होने की वजह से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. लेकिन महिलाओं ने मिलकर इन दिक्कतों का अंत कर दिया है, उन्होंने यहां तीन दिन में सड़क बना डाली।
टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक नीमा गांव की रेखा देवी बताती हैं कि सड़क नहीं होने की वजह से बारिश के दिनों में उनकी परेशानी और बढ़ जाती थी। वे कहती हैं, ‘हम लोग ब्लॉक मुख्यालय तक नहीं जा सकते थे जो हमारे गांव से केवल ढाई किलोमीटर दूर है। कई लोगों की मौत इसलिए हो गई क्योंकि वे सड़क न होने के चलते समय पर स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच सके। इनमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं।’ नीमा गांव की एक और महिला झालो देवी का कहना है कि कुछ साल पहले स्थानीय प्रशासन ने सड़क बनाने के लिए जमीन का अधिग्रहण करने की शुरुआत की थी लेकिन, जमीनों के मालिकों के विरोध की वजह से वह काम नहीं हो सका।
अब जब दोबारा बारिश होने वाली है तो इसे देखते हुए सड़क बनाने का काम महिलाओं ने अपने हाथ में ले लिया। गांवों के पुरुषों की थोड़ी-सी मदद लेकर उन्होंने तीन दिन में दो किलोमीटर की सड़क बना डाली. इस काम में 130 से थोड़ा ज्यादा महिलाओं की भागीदारी रही। सड़क बनाने से पहले महिलाएं उन लोगों के पास गईं जिन्होंने पहले प्रशासन का विरोध करते हुए जमीनें देने से इनकार कर दिया था। झालो देवी बताती हैं, ‘वे अंत में जमीनें देने के लिए मान गए। इस सड़क का 70 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय लोगों की निजी भूमि से होकर गुजरता है।’ वहीं, जमीन देने वालों का कहना है कि वे महिलाओं का जोश देखकर उन्हें जमीन देने को राजी हो गए।
गांव में रहने वाली उषा देवी बताती हैं कि कैसे सड़क बनाने वाली जगह पर तिरंगा फहराकर महिलाओं ने काम शुरू किया था। उन्होंने बताया, ‘जोरारपुर और दुर्गापुर की महिलाओं ने भी हमारा साथ दिया। गांव के पुरुषों ने पहले नींव डालने का काम पूरा कर दिया। फिर हम नदी के किनारे और बंजर जमीनों से रेत, मिट्टी और पत्थर ले आए। हम सुबह से शाम तक काम करते। अब हल्के वाहन आसानी से सड़क पर चल सकते हैं।’
बांका के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कुंदन कुमार महिलाओं की प्रशंसा करते हुए कहते हैं, ‘निजी भूमि के बिना सड़क बनाना संभव नहीं था। सरकार यह नहीं कर सकी। लेकिन गांव की महिलाओं ने सड़क बनाने के लिए ऐसा कर दिखाया।’ डीएम ने कहा कि वे अब वे संबंधित अधिकारियों से सड़क को पक्का करवाने को कहेंगे।

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