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शाबाश इंडिया – चित्तूर के पुलिसकर्मियों ने मिलकर बदल दी सरकारी अस्पताल की शक्ल सूरत

शाबाश इंडिया – चित्तूर के पुलिसकर्मियों ने मिलकर बदल दी सरकारी अस्पताल की शक्ल सूरत

गाज़ियाबाद | प्रेरणादायक खबरों में आज हम आपका परिचय एक ऐसे शहर से करा रहे हैं जहां के पुलिसकर्मियों ने अपनी जेब से पैसा खर्च कर शहर के सरकारी अस्पताल की शक्ल ही बदल दी।
सरकारी अस्पताल का जिक्र करते ही हमारी नज़रों के सामने एक ऐसी इमारत का नक्शा उभर कर आता है जहां खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं, जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं, बिस्तरों पर पड़े मैले कुचैले गद्दे खटमलों से भरे हैं। चित्तूर के सरकारी जनरल अस्पताल का भी कुछ ऐसा ही हाल था। मगर वहाँ जिला पुलिस ने पुलिसकर्मियों के सहयोग से एक विशेष अभियान चलाकर पैसा इकट्ठा किया और अब यह अस्पताल किसी निजी अस्पताल की तरह चमचमा रहा है।

इस अभियान की शुरुआत अस्पताल की इमारत की साफ-सफाई और रंग रोगन से हुई जिसके तहत सिपाहियों ने इमारत की खिड़की दरवाजों की मरम्मत भी की। उसके बाद पुलिसकर्मियों ने अस्पताल परिसर में वृक्षारोपण किया और खरंजा बनवाया। अस्पताल के खटमल भरे गद्दों को नए गद्दों से बदलने के बाद बर्न वार्ड में एयरकंडीशनर लगवाया गया। इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च हुए जिसमें से ज़्यादातर पैसा जिले में तैनात सिपाहियों और पुलिस अधिकारियों ने अपनी जेब से दिया। कुछ पैसा स्थानीय जनता से चन्दा मांग कर भी एकत्र किया गया।

चित्तूर के डीएसपी एसवी राजशेखर बाबू ने बताया कि हमें अस्पताल की हालत को बदलने में 50 दिनों का समय लगा। काम को अंजाम देने के लिए जिले में तैनात सर्किल अफसरों ने विशेष भूमिका निभाई। हालांकि पुलिस की ड्यूटी 24 घंटों की होती है, मगर फिर भी समय निकालकर सर्किल अफसरों ने अस्पताल का नियमित दौरा किया।
डीएसपी ने शहर के एक व्यस्त इलाके में नेकी की दीवार (Charity wall) बनाई और जनता से अनुरोध किया कि वे अपने फालतू कपड़े और सामान यहाँ दान कर दें। इसके साथ ही वहाँ तीन फ्रिज भी लगवाए गए जिनमें शादी और जन्मदिन जैसे समारोहों से बचा हुआ खाना रखा जाता है। डीएसपी ने बताया कि नेकी की दीवार बनने के बाद पुलिस अधिकारियों ने तय किया कि वे जन्मदिन और शादी की सालगिरह इस दीवार के पास ही मनाएंगे। धीरे-धीरे शहर में बात फैली और अब यह स्थान लोकल पर्यटन स्थल बन गया है जहां हर शाम शहर के लोग एकत्र होकर जिला अस्पताल को बेहतर बनाने की योजनाएँ बनाते हैं। जिला प्रशासन ने भी इस नेक काम में पुलिस और जनता का हाथ बटाया और अब इस अस्पताल की देखरेख का जिम्मा अपोलो अस्पताल को दे दिया गया है। चित्तूर पुलिस और वहाँ के जिम्मेदार नागरिकों को हमारा गाज़ियाबाद टीम की ओर से सलाम।
हमारा मत –

  • क्या यह बेहतर नहीं होगा कि चित्तूर से प्रेरणा लेकर गाज़ियाबाद की जनता भी एक अस्पताल और हर वार्ड में सरकारी स्कूल को गोद लेकर एक उदाहरण प्रस्तुत करे?
  • नागरिक पत्रकारिता पर आधारित हमारा गाज़ियाबाद डिजिटल समाचार पत्र की टीम ऐसे किसी भी प्रयास में आपके साथ है।

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