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शाबाश इंडिया: अमेरिका की नौकरी छोड़ शुरू किया गौ-पालन, राष्ट्रीय गौपालक रत्न से हुए सम्मानित

शाबाश इंडिया: अमेरिका की नौकरी छोड़ शुरू किया गौ-पालन, राष्ट्रीय गौपालक रत्न से हुए सम्मानित

गाज़ियाबाद। जहाँ लोग विदेश में नौकरी के लिए तरसते हैं वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं ज़िन्हें अपने गांव की मिट्टी ही भाती है। गाज़ियाबाद के असीम रावत, ज़िन्होंने अपनी अमेरिका की 50 लाख पैकेज की नौकरी सिर्फ इसलिए छोड़ दी कि उन्हे गऊ पालन करते हुए स्वरोजगार अपनाना था। आज उनकी गौशाला में 500 गाय हैं, और इससे 50 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। उनके इसी कार्य के दिल्ली में केन्द्रिय कृषि मंत्री ने राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया।

सिकंदरपुर गांव निवासी असीम ने 2001 में कम्प्यूटर साइन्स में बीटेक करने के बाद हैदराबाद से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद उन्होंने विभिन्न देशों की नामी कंपनियो में करीब 15 साल तक नौकरी की। साल 2015 में वो अमेरिका की एक प्रमुख कंपनी में 50 लाख के सालाना पैकेज पर काम कर रहे थे। वह बताते हैं कि तभी उनके मन में देश लौटकर अपना काम शुरू करने का विचार आया और वो नौकरी छोड कर वापस आ गए।

एक बार असीम ने एक टीवी प्रोग्राम में देखा कि लोग कह रहे थे कि गाय बस पूजा और धार्मिक आस्था तक ही ठीक है। जब सवाल पेट पालने का हो तो उससे कुछ नहीं हो सकता। इसी बात को सोचते हुए उन्होंने इसको रोजगार बनाने की ठान ली। असीम ने जब परिवार में अपनी इच्छा जाहिर की तो उन्हे भारी विरोध झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने भी पक्का इरादा कर लिया था कि अब तो ये ही काम करना है। लिहाजा उन्होंने अपना घर और गाड़ी बेच कर इस अपने गांव में ही इस काम को शुरू किया।

करीब तीन साल की मेहनत के बाद आज उनकी गौशाला में 500 गाय है, जहां करीब 50 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। असीम इसके संचालन के लिए किसी भी तरह का दान स्वीकार नहीं करते हैं। वह दूध और घी के साथ ही गौमूत्र और जैविक खाद का भी कारोबार कर रहे हैं। उनकी मेहनत का ही नतीजा है गौ पालन में वो ज़िले भर में पहले स्थान पर रहे हैं, जिसके चलते उन्हें सम्मानित भी किया गया।

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