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बिना जनसहयोग के ट्रैफिक जाम से मुक्ति संभव नहीं – एसएसपी वैभव कृष्ण

बिना जनसहयोग के ट्रैफिक जाम से मुक्ति संभव नहीं – एसएसपी वैभव कृष्ण

गाज़ियाबाद | कहीं चल रहे निर्माण के कारण तो कहीं जीडीए की खराब रोड इंजीन्यरिंग की वजह से गाज़ियाबाद की सड़कों पर हमेशा जाम लगा रहता है। इसके अलावा सड़कों पर जाम और बढ़ती दुर्घटनाओं का एक सबसे बड़ा कारण है – गाज़ियाबाद के नागरिकों द्वारा यातायात के नियमों की अनदेखी। चाहे वह रैड लाइट जंप करना हो या रोंग साइड ड्राइविंग, गाज़ियाबाद की सड़कों को देखकर लगता है कि यहाँ के नागरिकों को यातायात के नियमों की परवाह ही नहीं है। हालांकि ऐसा नहीं है कि यहाँ रहने वाले लोग असभ्य और अनपढ़ हैं, मगर सड़क पर निकलते ही शहर के सभी पढ़े लिखे और जागरूक नागरिक भी उन असभ्य लोगों की कतार में शामिल हो जाते हैं जिन्हें अपने पैसे और सत्ता से नज़दीकियों के चलते नियमों और कानून की परवाह नहीं। इस संबंध में हमारा गाज़ियाबाद की टीम ने जब गाज़ियाबाद के एसएसपी वैभव कृष्ण से बातचीत की तो कुछ रोचक तथ्य सामने आए।

एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि जिले में पर्याप्त पुलिस बल न होने के कारण लोग स्थिति का फायदा उठाते हैं। हमने सड़क पर यातायात पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाई है और आने वाले दिनों में आपको स्थिति में भारी बदलाव नज़र आएगा। उन्होंने बताया कि शहर की यातायात स्थिति को बेहतर करने के लिए 100 कांस्टेबल, 36 हैड कॉन्स्टेबल और 15 सब-इंस्पेक्टर तैनात किए गए हैं। इन्हें वर्तमान तैनाती से हटा कर यातायात पुलिस से जोड़ने की प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी।

जब हमने उन्हें कुछ ऐसे पॉइंट्स बताए जहां पर ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद लोग रोंग साइड ड्राइविंग करते हैं तो वैभव कृष्ण का कहना था कि ऐसा नहीं है कि पुलिस वाले जान बूझ कर लोगों को नियमों के उल्लंघन का मौका देते हैं। व्यस्त समय में चौराहों पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की पहली ज़िम्मेदारी यातायात को सुचरू रूप से चलाना होती है। अगर ऐसे में ट्रैफिक मैनेजमेंट छोड़ कर चालान काटने में लग जाएँ तो जाम के कारण स्थिति और भी भयंकर हो जाएगी।

ट्रैफिक मैनेजमेंट में जन सहयोग की जरूरत पर बल देते हुए एसएसपी ने कहा कि बिना जनता के सहयोग के पुलिस चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि देखकर ताज्जुब होता है कि गाज़ियाबाद के नागरिक दिल्ली की सीमा में प्रवेश करते हैं सीट बेल्ट लगा लेते हैं और दुपहिया चालकों के हेलमेट उनकी कोहनी या बाइक के शीशे से उतर कर सर पर पहुँच जाते हैं। वैभव कृष्ण ने बताया की ट्रैफिक मैनेजमेंट में मदद के लिए सिटिज़न वॉलंटियर फोर्स, सिविल डिफेंस और ऐसी ही अन्य संस्थाओं की मदद ली जा रही है। नागरिकों और खास कर बच्चों को यातायात के नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए यातायात पुलिस के अधिकारी समय-समय पर स्कूल कालेजों में जाकर बच्चों से मिलते हैं।

एसएसपी ने बताया कि यातायात के संचालन में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के लिए पुलिसकर्मियों को लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है। जल्द ही शहर में ई चालान की व्यवस्था भी लागू कर दी जाएगी। इससे चालान काटने में कम समय लगेगा और मोबाइल फोन और सीसीटीवी कैमरों की मदद से दोषी व्यक्तियों के चालान भी काटे जाएँगे।

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