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इंसानियत की मिसाल: अजय की जान बचाने के लिए आरिफ ने तोड़ दिया रोज़ा

इंसानियत की मिसाल: अजय की जान बचाने के लिए आरिफ ने तोड़ दिया रोज़ा

उत्तराखंड। देश में जहां कई जगहों पर छोटी-छोटी बातों को लेकर दोनों संप्रदायों के बीच जहर घोलने की कोशिश की जाती है, वहीं इससे अलग यहाँ एक मुस्लिम युवक ने एक हिन्दु युवक की जान बचाने के लिए अपना रोजा तोड़ दिया। मामला उत्तराखंड के देहरादून की है जहाँ आरिफ खान ने रोजा तोड़कर हिंदू युवक की जान बचा ली। आरिफ ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। आरिफ ने मैक्स अस्पताल में भर्ती अजय बिजल्वाण (20 वर्ष) को खून देकर जान बचा ली।

अजय बिजल्वाण आईसीयू में है। वह लीवर में संक्रमण से ग्रसित हैं, जिस कारण उनकी प्लेटलेट्स तेजी से गिर रही थीं और शनिवार सुबह पांच हजार से भी कम रह गई थीं। काफी कोशिश के बाद भी डोनर नहीं मिला। डॉक्टरों ने अजय के पिता खीमानंद बिजल्वाण से ए-पॉजिटिव ब्लड का इंतजाम करने को कहा। काफी कोशिश के बाद भी डोनर नहीं मिला। इसके बाद खीमानंद के जानने वालों सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मदद मांगी।

नेशनल एसोसिएशन फॉर पेरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफ खान को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सूचना मिली तो उन्होंने अजय के पिता को फोन किया। आरिफ सहस्रधारा रोड (नालापानी चौक) पर रहते हैं। आरिफ ने कहा कि उनके रोजे चल रहे हैं, अगर डॉक्टरों को काई आपत्ति नहीं है तो वह खून देने के लिए तैयार हैं। उधर डॉक्टरों ने कहा कि खून देने से पहले रोजा तोड़ना पड़ेगा। आरिफ ने बिना देर किए रोजा तोड़ा और  अस्पताल पहुंच गए। आरिफ ने कहा कि ‘अगर मेरे रोजा तोड़ने से किसी की जान बच सकती है तो मैं पहले मानवधर्म को ही निभाऊंगा। रोजे तो बाद में भी रखे जा सकता है, लेकिन जिंदगी की कोई कीमत नहीं’।

 

 

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