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सँवरता गाज़ियाबाद – शहर को मिला इंडियाज़ फासटेस्ट मूवर बिग सिटी का दर्जा

सँवरता गाज़ियाबाद – शहर को मिला इंडियाज़ फासटेस्ट मूवर बिग सिटी का दर्जा

स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हो चुके गाज़ियाबाद शहर ने नगरायुक्त सीपी सिंह की लगातार मेहनत की बदौलत एक बड़ी कामयाबी हासिल की। बुधवार को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा की गई घोषणा के अनुसार गाज़ियाबाद ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में लंबी छलांग लगाते हुए 36वीं रैंक हासिल की है। नगरायक्त ने जब गाज़ियाबाद नगर निगम की कमान संभाली थी तो स्थिति बहुत ही दयनीय थी। पिछले साल हमारे गाज़ियाबाद की रैंकिंग 351 थी। इस छलांग की वजह से ही गाजियाबाद को इंडियाज फास्टेस्ट मूवर बिग सिटी का तमगा मिला है। वहीं देश के सबसे साफ शहरों में इंदौर लगातार दूसरे साल नंबर-1 पर रहा। नगरायुक्त ने बताया कि इस उपलब्धि के लिए गाजियाबाद को शहरी विकास मंत्रालय की ओर से अवॉर्ड दिया जाएगा।

इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण 4213 शहरों के बीच हुआ था। इसमें गाजियाबाद देश का पहला ऐसा शहर बना जिसने अपनी रैंकिंग में सबसे तेजी से सुधारी। बता दें कि इस कामयाबी के पीछे नगरायुक्त सीपी सिंह की लगातार की गई दिन रात की मेहनत शामिल है। शहर में रहने वाले बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि पिछले कई महीनों से नगरायुक्त हर सुबह शहर के किसी एक वार्ड का भ्रमण कर वहाँ की साफ सफाई का जाएजा लेते हैं। शहर की साफ सफाई को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम ने कई वार्डों में डोर टु डोर कूड़ा कलेक्शन शुरू किया। सिटी में कूड़े के करीब 642 डंप पॉइंट थे, इनमें से 200 पर विलुप्त कूड़ा घर बनाया। इसके अलावा कचरे के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए शहर के सभी कूड़ा डलाव पॉइंट समाप्त करने के लिए कलेक्शन सेंटर बनाने का ले-आउट तैयार किया गया। शहर को ओडीएफ बनाने के लिए इंटरनैशनल स्टैंडर्ड के हिसाब से 84 स्थानों पर टॉयलेट बनाए गए।

सीपी सिंह ने इस कामयाबी का श्रेय नगर निगम के कर्मचारियों को देते हुए बताया कि हमारा अगला लक्ष्य गाज़ियाबाद को देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाना है। इसके लिए हमें अपनी डोर टु डोर कूड़ा कलेक्शन सेवा को बेहतर बनाना होगा। नगर निगम क्षेत्र में कुल 100 वॉर्ड हैं फिलहाल इनमें से सिर्फ 69 में ही यह सिस्टम लागू हो सका है। इसके अलावा शहर में अभी सिर्फ 1 ही वेस्ट टु कंपोस्ट प्लांट है और इसकी रोजाना की क्षमता 300 मीट्रिक टन है, जबकि हर रोज गाजियाबाद से 1000 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। शहर को ऐसे कई और पॉइंट्स की जरूरत है। जल्द ही गालन्द में एक वेस्ट टू एनर्जी प्लांट भी लगाया जाएगा। डस्टबिनों के मामले में भी गाज़ियाबाद काफी पिछड़ा हुआ है। हर वॉर्ड में 500 मीटर पर एक डस्टबिन रखा जाना चाहिए था, जो अनुपात में मात्र 20 फीसदी रहा।

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