ताज़ा खबर :
prev next

अफसर मिलनसार तो पब्लिक मददगार

अफसर मिलनसार तो पब्लिक मददगार

मेरी तरह आप भी इस बात को मानते होंगे कि हमारे शहर के सरकारी अफसरों और पब्लिक के बीच आपसी संवाद की बेहद कमी है। संवाद के नाम पर अगर कुछ है तो वो है अफसरों द्वारा लगाए जाने वाला जनता दरबार, जहां जनता फरियाद करती है और अफसरों से मिले आश्वासन के झुनझुने को बजाती घर चली जाती है। हम सब जानते हैं कि यहाँ अफसरों और आम आदमी के बीच के रिश्ते कैसे हैं। आज़ादी के बाद सामंतों और गोरे बाबुओं की जगह इन आईएएस और पीसीएस अफसरों ने ले ली, जिनकी अकड़ और नखरे देख कर इन को पब्लिक सर्वेंट कहने में संकोच होता है। सिर्फ सत्ताधारी दल के छुटभैये नेताओं से लेकर अपने से बड़े अफसरों के सामने ही अदब से पेश आते इन अधिकारियों का आम जनता से रिश्ता लगभग शून्य है।
जहां शहर में ऐसे फर्जी समाजसेवकों की कमी नहीं जो इन अफसरों के साथ अपनी तस्वीरें अखबारों में छपवा कर पब्लिक पर रौब गाँठते हैं वहीं शहर में ऐसे लोग भी कम नहीं है जो प्रचार से दूर रहकर अपने बल पर अनेकों कल्याणकारी काम निस्स्वार्थ भाव से कराते रहते हैं। शहर में अनेकों संस्थाएं इन्हीं लोगों के अप्रत्यक्ष सहयोग से चल रहीं है। लेकिन अफ़सोस तब होता है जब आला अधिकारी ऐसे लोगों के साथ मिलकर जिले को बेहतर बनाने के लिए प्रयास ही नहीं करते।

देश के कई जिलों में अधिकारियों ने आम जनता के साथ मिलकर बहुत बड़े-बड़े कल्याणकारी काम किये हैं। गाज़ियाबाद के भी कई पूर्व जिलाधिकारियों ने जिले के समाज सेवियों, उद्यमियों और बिल्डर्स के साथ मिलकर बहुत सारे ऐसे काम किए जो मिसाल बने। परन्तु बड़े दुःख की बात है की पिछले काफी समय से आम जन और अधिकारियों के समन्वय से कोई यादगार काम नहीं हो पाया है। जिले के पूर्व जिलाधिकारी एस वी एस रंगाराव ने उद्यमियों के सहयोग से शहर के कई प्राथमिक स्कूलों की काया पलट कर दी थी। उस से पूर्व की ज़िलाधिकारी अपर्णा उपाध्याय तो हर महीने जिले के उदार उद्यमियों, निजी स्कूल-कॉलेज संचालकों और बिल्डर्स के साथ एक बैठक किया करती थीं जिसमें जिले के एसएसपी, नगरायुक्त और अन्य शीर्ष अधिकारी मौजूद हुआ करते थे। इन मीटिंग्स में हर माह जनकल्याण के कई बड़े प्रोजेक्ट्स इन उदार जनों की भागीदारी से उठाये और पूरे किए जाते थे।

”हमारा गाज़ियाबाद”
न्यूज़ पोर्टल पर हम आये दिन ऐसी समस्याओं के बारे में लिखते हैं जिनका इलाज अकेले न तो प्रशासन और न ही जनता करने में समर्थ है। अकसर बहुत से परेशानियों को दूर करने के लिए जनता को जागरूक करना ही काफी होता है। लेकिन ये काम अकेले प्रशासन की बड़ी से बड़ी फ़ौज भी नहीं कर सकती। शहर को साफ़ रखना हो, महिलाओं की सुरक्षा का मामला हो, वृक्षारोपण करना हो या फिर सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर ठीक करना हो, ऐसे बहुत से काम हैं जो प्रशासन कभी भी अकेला कर ही नहीं सकता। जनता का साथ पाने के लिए प्रशासन को अपील करने के अलावा भी बहुत कुछ करना होगा। अफसरों और ख़ास तौर से शीर्ष अधिकारियों को अपनी सोच में बुनियादी बदलाव करना होगा।
आज पढ़ा लिखा और संभ्रांत नागरिक जो प्रशासन की आवाज़ पर किसी भी प्रोजेक्ट को सफल बनाने में सक्षम है, वह प्रशासन से उचित सम्मान और संवाद की उम्मीद रखता है। कितना अच्छा हो की इस बात को बंद कमरे में बैठने और पर्दा लगी गाड़ियों में घूमने वाले अधिकारी भी समझ लें। हर दिन नए-नए लोगों को सहयोगी बनाकर प्रशासन अपना काम आसान बना सकता है और जिले में कई अधूरे और बहुत ज़रूरी कल्याणकारी काम करा सकता है। हम सब जानते हैं कि इगो और एटीट्यूड वो काम कभी नहीं कर सकते जो विम्र्ता और मिलनसारिता कर सकती है। मिलकर काम करना है तो नियमित रूप से मिलना भी होगा।

मुझे लगता है कि मैंने अपनी बात कह दी है। अब देखना ये है कि मेरा ये सन्देश जिले के किन अधिकारियों को कितना भाता है और किन अधिकारियों को गुस्सा दिलाता है। लेकिन एक बात साफ़ है कि अगर हमारे जिले के अधिकारी जिले के उदार और सक्षम लोगों को साथ ले कर चल पाए तो जिले की सूरत को काफी हद तक बेहतर बनाया जा सकता है। जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान और नगर आयुक्त आदि को उनके जाने के बाद उनके कामों की वजह से याद रखा जाता है। मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि आला अधिकारियों की पहल पर जिले के लोग सहयोग देने में पीछे नहीं रहेंगे और हमारे अधिकारी गाज़ियाबाद में अपने कार्यकाल को एक बेहतरीन व यादगार कार्यकाल बना कर ही जायेंगे।

धन्यवाद।

By अनिल कुमार (पब्लिशर व एडिटर-इन-चीफ) : Saturday 21 जुलाई, 2018 19:24 PM