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डीएमसी का फैसला: एम्स के दो डॉक्टरों से छीना लाइसेंस, एक माह नहीं करेंगे इलाज

डीएमसी का फैसला: एम्स के दो डॉक्टरों से छीना लाइसेंस, एक माह नहीं करेंगे इलाज

नई दिल्ली। दिल्ली के एम्स में बहुचर्चित नर्स राजबीर कौर की मौत के मामले में करीब साल भर बाद दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) ने फैसला सुनाया। एम्स के दो डॉक्टरों से लाइसेंस वापस लेकर उन्हें एक महीने तक प्रैक्टिस न करने का आदेश दिया है। हालांकि परिजनों ने एम्स की सीनियर रेजीडेंट डॉ. सीमा सिंघल पर आरोप लगाए थे। सुनवाई के दौरान उनके खिलाफ कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। उधर, परिजनों ने डीएमसी के फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे गलत बताया है।

पिछले वर्ष 16 जनवरी को एम्स की नर्स राजबीर कौर को भर्ती किया गया था। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। इलाज के दौरान शिशु की मौत हो गई।  4 फरवरी को राजबीर कौर की भी मौत हो गई। इस मामले में मृतक के परिजनों और नर्सिंग एसोसिएशन ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया।

इस मामले में कई दिनों तक एम्स में नर्सिंग और डॉक्टरों के बीच काफी विवाद भी देखने को मिला। इसी बीच एम्स प्रबंधन ने उच्चस्तरीय जांच में डॉक्टरों की लापरवाही का खुलासा किया। साथ ही एनेस्थेसिया विभाग की एक डॉक्टर को बर्खास्त करने का फैसला भी लिया।

पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का हर्जाना भी एम्स प्रबंधन ने दिया। पिछले दिनों नर्स राजबीर कौर के नाम पर लैब का नाम भी रखा। इसी मामले में दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने अब फैसला  सुनाया है।   काउंसिल के सचिव डॉ. गिरीश त्यागी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद गठित कमेटी ने जांच के बाद दो डॉक्टरों को एक महीने के लिए प्रैक्टिस न करने का आदेश दिया है।

राजबीर कौर के पति मनीष कुमार का कहना है कि पत्नी और बच्चे की मौत के एवज में महज दो डॉक्टरों को एक माह के लिए प्रैक्टिस न करने का फैसला नाइंसाफी है। आरोपियों को ठोस सजा मिलनी चाहिए। वे जल्द ही डीएमसी के फैसले को लेकर कोर्ट में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने के लिए याचिका दायर करेंगे।

 

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